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ताबूत जैसे कमरों में यहां जिंदगी गुजार रहे लोग, यहीं खाना-नहाना पड़ता है इन्हें

यहां के एक नामी फोटोग्राफर ने अपनी फोटोज़ से इसका खुलासा किया है। नाम है बेनी लैम। वह कई क्षेत्रीय-अंतर्राष्ट्रीय...

दुनिया के बेहतरीन शहरों का जब भी जिक्र होता है, तो हॉन्ग कॉन्ग का नाम जरूर आता है। चीन के दक्षिणी पूर्वी हिस्से में बसा यह नगर अपनी गगनचुंबी इमारतों, नियॉन (Neon) लाइट्स शानदार और जीवनशैली के लिए जाना जाता है। लेकिन बातों में यह जितना फील गुड टाइप लगता है, असल में उतना है नहीं।

यहां के एक नामी फोटोग्राफर ने अपनी फोटोज़ से इसका खुलासा किया है। नाम है बेनी लैम। वह कई क्षेत्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड्स और विज्ञापन एजेंसियों के लिए काम करते हैं। उन्होंने नेशनल जियोग्राफिक से इस बारे में अपना अनुभव साझा किया है।

गली-गली घूम-घूम कर उन्होंने हॉन्ग-कॉन्ग शहर की शानदार तस्वीरें खींची हैं। जिसमें लोग पिंजड़े, दड़बे और ताबूत जैसे घरों में रहते पाए गए। यहां 10 सालों से ऐसे ही हालात हैं। किसी घर में लकड़ियों के दरवाजे हैं, तो कहीं लकड़ी के पटरे से बना 15 स्क्वायर फीट का घर था। किचन-बेसिन और कमोड को सटा देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे। वहीं खाना बनता है और वहीं नहाना-धोना होता है।

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लैम का मकसद यहां की चकाचौंद से बाहर रहने वालों की जिंदगी में रोशनी भरना है। उन्होंने बताया कि ये हमारी जिंदगी का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए हम इन्हें पूछते तक नहीं। मगर यही वे लोग हैं, जो सीधे तौर पर हमारी जिंदगियों से जुड़े हैं। चाहे वह रेस्त्रां में बैरा हो या कोई और।

वह आगे बताती हैं कि उनमें और हममे सिर्फ घर का फर्क है। वे अपना घर काम छोटे के दड़बेनुमा कमरों में करते हैं। सोना, खाना और बाकी चीजें इनमें शामिल होती हैं। लेकिन घर तो आखिर घर है। यही वजह है कि 18 वर्ग फुट के घरों को भी यह आलीशान बंगले से कम नहीं समझते।

(फोटोः बेनी लैम)

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