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दुष्कर्म की समस्या से निपटने के लिए ओशो ने सुझाए दिलचस्प उपाय

आदिवासी समुदाय में प्रचलित एक प्रथा को इस समस्या से निपटने में बेहद प्रभावी बताया है।

Author नई दिल्ली | December 2, 2017 16:03 pm
ओशो रजनीश ने कई समस्याओं से निपटने के लिए लीक से हटकर सलाह दी है।

भारत में तमाम उपायों के बावजूद दुष्कर्म की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। निर्भया कांड के बाद दुष्कर्म की घटनाओं से निपटने के लिए बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं। इसके बावजूद दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं। ओशो ने ऐसी  घटनाओं से निपटने का अनूठा उपाय सुझाया है । उन्होंने बस्तर के आदिवासी समुदाय में प्रचलित एक प्रथा को इस समस्या से निपटने में बेहद प्रभावी बताया है। उनका दावा है कि आदिवासियों में प्रचलित व्यवस्था को अपना कर पूरी दुनिया से इस गंभीर समस्या को मिटाया जा सकता है। उनका मानना है कि स्त्रियों की शारीरिक बनावट कुछ ऐसी है कि वह बालात्कार नहीं कर सकती हैं। ऐसे में उनको इससे बचाना बेहद अहम है।

ओशो छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर जिले के आदिवासी समुदाय में प्रचलित घोटुल व्यवस्था का जिक्र करते हैं। वह बताते हैं कि छोटे-छोटे आदिवासी गांवों के बीच में एक सार्वजिनक मकान बना होता है जहां युवा अवस्था में पहुंचते ही युवक-युवतियों को भेज दिया जाता है। कई गांवों की आबादी तो महज 200 से 300 तक होती है। वहां उन्हें दो वर्ष रहना होता है। इस दौरान वे आपस में शारीरिक संबंध बनाने के साथ अन्य चीजों के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। लेकिन, उन्हें एक शर्त का पालन करना पड़ता है। कोई भी किशोर या किशोरी साथ में तीन दिन से ज्यादा नहीं रह सकते हैं। ओशो कहते हैं कि ऐसे में दो वर्ष की अवधि में दोनों को साथ में रहने के कई मौके मिलते हैं।

घोटुल व्यवस्था के तहत लड़कियों की उम्र 13 वर्ष होना अनिवार्य होता है। ओशो की मानें तो 24 महीने बीतते-बीतते किशोर-किशोरी एक-दूसरे को भलीभांति जानने और समझने लगते हैं। युवती को इस बात का पता चल जाता है कि उसे किससे तृप्ति मिलती है और किशोर को भी मालूम हो जाता है कि कौन उसे सुख पहुंचा सकता है। दो साल के बाद उनकी पसंद के युवक या युवती से शादी कर दी जाती है। ओशो का मानना है कि इस व्यवस्था का पालन करने पर दूसरे की पत्नी के प्रति आकर्षण नहीं रहता है। इस परिस्थिति में दुष्कर्म की घटनाएं खुद थम जाएंगी। ओशो ने बताया कि उन्होंने खुद वहां का दौरा कर हालात का जायजा लिया था। उन्होंने इस व्यवस्था को बदलने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर चिंता भी जताई है।

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