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अब तक 51 हजार सांपों को पकड़ चुकी है ये लड़की, लोगों के बीच स्नेक दीदी के नाम से हैं मशहूर

इन्होंने अब तक 51 हजार सांप पकड़े हैं लेकिन आज तक कभी भी किसी सांप ने ना तो इन्हें काटा ना ही कभी जख्मी किया। सालों से सांपो को पकड़ने के अनुभव के चलते वनिता उन्हें देखते ही ये अंदाजा लगा लेती हैं कि ये सांप जहरीला और खतरनाक है या नहीं।

हिंदुस्तान में ऐसी महिलाओं की कमी नहीं है जिन्होंने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। ऐसी ही देश की एक बेटी है जिसने अब तक 51 हजार सांपों को पकड़कर पूरे विश्व को चौंका दिया है। 12 साल की छोटी सी उम्र से ही सांपों को पकड़ने का काम करने वाली इस लड़की का नाम है वनिता बोरहाडे। इनके लिए ये बात मशहूर है कि सांप इन्हें देख अपने आप इनके पास आ जाते हैं। इनकी इसी खासियत से लोग इन्हें स्नेक दीदी के नाम से भी पुकारने लगे हैं।

वनिता बोरहाडे महाराष्ट्र के भलसाड़ जिले की रहने वाली हैं। जब ये 12 साल की थीं तभी से सांपों को पकड़ने का काम शुरू कर दिया था। इन्होंने अब तक 51 हजार सांप पकड़े हैं लेकिन आज तक कभी भी किसी सांप ने ना तो इन्हें काटा ना ही कभी जख्मी किया। सालों से सांपो को पकड़ने के अनुभव के चलते वनिता उन्हें देखते ही ये अंदाजा लगा लेती हैं कि ये सांप जहरीला और खतरनाक है या नहीं। बड़े से बड़े जहरीले सांप इन्हें अपना दोस्त समझते हैं और देखते ही इनके पास खुद चले आते हैं। ये वनिता का अनुभव और उनकी हिम्मत ही है कि उन्होंने सिर्फ मोबाइल की रोशनी से मण्यालर जैसे कई जहरीले सांपों को पकड़ चुकी हैं। सांप पकड़ने के दौरान वनिता किसी भी तरह के औजार या दस्ताने का इस्तेमाल नहीं करती हैं।

लोगों को पहले लगता था कि वनिता कोई मदारी हैं और मोहल्लों में घूम कर सांप पकड़ने का जादू दिखाती हैं। लेकिन धीर-धीरे लोगों को समझ में आने लगा कि ये कोई मदारी या जादूगर नहीं है। आज आलम ये है कि आसपास के इलाके में अगर किसी को भी कोई सांप दिख जाता है तो वो सबसे पहले अपनी स्नेक दीदी वनिता को ही फोन करता है। वनिता सांपों को पकड़ने के बादा किसी को देने की जगह उसे जंगल में सुरक्षित स्थान पर छोड़ देती हैं।

भलसाड़ जिले के मेहकर तहसील के एक किसान परिवार में जन्मी वनिता बोरहाडे बचपन से ही जंगलों में अपने आदिवासी दोस्तों के साथ घूमी हैं। नदी के पानी में मछली पकड़ते-पकड़ते वनिता ने सांप पकड़ना सीखा। शादी के बाद पति से मिले प्रोत्साहन से वनिता ने अपने शौक को प्रोफेशन बना लिया। सांपों को जीवनदान देने का काम करने वाली वनिता को सरकार की ओर से भी कई बार सम्मानित भी किया गया है। इनकी जीवनी टीचर डिप्लोमा कोर्स के पाठ्यक्रम में भी शामिल की गई है। वनिता आज स्कूल के बच्चों को सांप पकड़ने की ट्रेनिंग देने का काम भी करती हैं।

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