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पंजे के बजाय यहां पैर के अंगूठे लड़ा एक-दूजे को टक्कर देते हैं लोग

किस्सा थोड़ा पुराना है, लेकिन आज भी इस अंगूठे वाले गेम को बताने पर ताजा हो जाता है। स्टैफोर्डशायर में वेटन स्थित 'ये ओल्डे रॉयल ओक इन' पर...

स्कूल-कॉलेज के दिन भी बड़े मस्त होते हैं। यारों की यारी, बुढ़ापे तक जहन में ताजी करारी रहती है। उसी में कुछ चीजें होती हैं, तो हम भूले नहीं भूलते हैं। उसी में से एक होता है पंजा लड़ाना, लेकिन क्या कभी पंजे के बजाय अंगूठा लड़ाने की बात सुनी है।

अगर नहीं, तो यह खबर आपको इस नए खेल से रूबरू कराएगी। सच में, 1974 के आसपास ब्रिटेन में कुछ दोस्त यूं बैठे थे। चारों के बीच महफिल जमी थी। बातचीत हो ही रही थी कि अचानक उनमें से दो अंगूठा लड़ाने लगे। बस, यहीं से हो गया नए खेल का जन्म।

किस्सा थोड़ा पुराना है, लेकिन आज भी इस अंगूठे वाले गेम को बताने पर ताजा हो जाता है। स्टैफोर्डशायर में वेटन स्थित ‘ये ओल्डे रॉयल ओक इन’ पर कुछ दोस्त बैठे थे। वह खेल में ब्रिटेन की हालत पर बतिया रहे थे। चर्चा कर रहे थे कि ब्रिटेन अभी तक किसी भी चीज में राष्ट्रीय स्तर पर नहीं पहुंचा है।

उन्हीं में से एक शराब पिए था। अचानक उसका अंगूठा दूसरे दोस्त के अंगूठे से लड़ गया। इसी तरह उन्होंने नए खेल को जन्म दे डाला। वह कुछ और नहीं बल्कि टो रेसलिंग थी। यानी पैर के अंगूठे लड़ाना। फिर क्या था, यहीं से खेल मशहूर हुआ।

दो सालों तक इन यारों को कोई इस खेल में मात नहीं दे पाया। 1976 में फिर कनाडा मूल का एक शख्स आया। उसने इन लोगों से अंगूठा लड़ाया और बाजी मारी। इसके बाद यह खेल खासा चर्चित हुआ। इत्ता कि इसे ओलंपिक्स में शामिल करने की मांग तक हुई।

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