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ब्राजील के जंगलों में रहने वाली यह जनजाति गिलहरी-बंदर को कराती है स्तनपान

अवा जनजाति के लोगों को जानवरों से बेहद लगाव है। यह उनसे बच्चों जैसे पेश आते हैं। महिलाएं 'हनीमा' बनकर जानवरों...

इंसान और जानवर का सदियों से नाता रहा है। दोनों एक-दूसरे के करीब रहे हैं। दुनिया में आज भी एक जनजाति है, जो खुद कठिन परिस्थितियों में होने के बाद भी पशु प्रेम नहीं त्याग पा रही है। पूर्वी ब्राजील स्थित अमेजॉन के जंगलों में अवा (Awa) नाम की जनजाति पाई जाती है। यह दुनिया की सबसे लुप्तप्राय जनजाति है। 500 साल पहले ब्राजील के मारान्हाओ (Maranhao) में इनकी संख्या हजारों में थी, जो आज 300 पर सिमट गई है। इसमें 60 लोग ऐसे हैं, जो दुनिया के किसी और शख्स से आजतक नहीं मिले। यह जनजाति लगातार जंगल का भ्रमण करती रहती है।

अवा जनजाति के लोगों को जानवरों से बेहद लगाव है। यह उनसे बच्चों जैसे पेश आते हैं। महिलाएं ‘हनीमा’ बनकर जानवरों को स्तनपान कराती हैं। वे उन्हें परिवार का हिस्सा समझती हैं। बदले में ये जानवर इनकी रोजमर्रा के कामों में मदद करते हैं। यहां बहुत सारे अवा परिवारों ने कई जंगली जानवर पाल रखे हैं। फोटोग्राफर डोमेनिसो पुग्लिएस (Domenico Pugliese) वहां इन लोगों के साथ कुछ वक्त बिता कर आए।

वह इन लोगों से पहले 2009 में मिले थे। वह बताते हैं कि ये लोग हम लोगों की दुनिया का कॉन्सेप्ट नहीं समझते। इनके लिए परिवार सबसे महत्वपूर्ण होता है, जिसमें जानवर भी होते हैं। वे उनके रोजमर्रा के काम में मदद करते हैं। मसलन ऊंचे पेड़ों से फल तोड़ कर लाना, नट्स तोड़ना और सोने के दौरान उनकी निगरानी करना।

अवा की सुरक्षा के लिए कैंपेन चलाने वाली चैरिटी सर्वाइवल इंटरनेशनल के मुताबिक ये लोग जंगली सुअर, गिलहरी, तोते और बंदर तक पालते हैं। अवा के लिए जानवर भी भोजन होते हैं, लेकिन एक बार वे जिसे स्तनपान करा देते हैं, फिर उसे खाते नहीं हैं। फोटोग्राफर के मुताबिक ये लोग गिलहरी और बंदरों को बच्चों की तरह स्तनपान कराते हैं। 1835 में इस जनजाति ने यूरोपीय शासकों के खिलाफ क्रांति छेड़ी थी, जिसमें तकरीबन एक लाख लोगों की मौत हो गई थी।

(फोटो सोर्सः survivalinternational.org)

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