Jan 15, 2026
टर्की (Turkey) नाम सुनते ही दिमाग में दो चीजें आती हैं- एक देश और एक पक्षी। मजेदार बात यह है कि टर्की देश में टर्की पक्षी को 'टर्की' नहीं कहा जाता, बल्कि उसे कहा जाता है 'हिंदी', यानी भारत से आया पक्षी।
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अब सवाल उठता है- जब टर्की पक्षी असल में उत्तर और मध्य अमेरिका का मूल निवासी है, तो दुनिया के इतने देशों में इसका नाम भारत, पेरू, रोम या फ्रांस से क्यों जुड़ा है?
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आज जिसे हम टर्की कहते हैं, वह पक्षी मूल रूप से मेक्सिको और आसपास के इलाकों में पाया जाता था। एजटेक सभ्यता में इसे 'हुएह्शोलोत्ल (Huehxolotl)' कहा जाता था। यानी इसकी असली पहचान अमेरिका से जुड़ी है।
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इस पूरी गड़बड़ी की जड़ है 16वीं सदी का वैश्विक व्यापार, खासकर पुर्तगालियों की समुद्री यात्राएं। पुर्तगाली व्यापारी भारत (खासतौर पर कालीकट/कोझिकोड) से मसाले लाते थे। अफ्रीका से गिनी फाउल (जो टर्की जैसी दिखती है) लाते थे। और स्पेनिश व्यापारियों से अमेरिका से आए असली टर्की खरीदते थे।
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लेकिन वे अक्सर पक्षियों की असली उत्पत्ति नहीं बताते थे। नतीजा यह हुआ कि यूरोप के लोग समझ बैठे कि ये पक्षी भारत या कालीकट से आए हैं। यह कालीकट (आज का कोझीकोड, केरल) उस समय एक बड़ा व्यापारिक बंदरगाह था।
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तुर्की भाषा में टर्की को Hindi कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'भारत से आया पक्षी'। अरबी देश में दिक़ रूमी (रोमन मुर्गा), हिब्रू (इजराइल) में टार्नेगोल होडू (भारत का मुर्गा), फ्रांस में Dinde यानी Poule d’Inde (भारत की मुर्गी)।
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नीदरलैंड/बेल्जियम में Kalkoen यानी कालीकट की मुर्गी। ग्रीस/ख्मेर/स्कॉटिश गेलिक में 'फ्रांसीसी मुर्गी'। यानि हर देश ने इस पक्षी को किसी और देश से जोड़ दिया।
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पुर्तगाली भाषा में टर्की को Peru कहा जाता है। उस दौर में पेरू शब्द पूरे स्पेनिश-भाषी अमेरिका के लिए इस्तेमाल होता था, इसलिए यह नाम भी गलतफहमी का नतीजा है, न कि चालाकी।
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इंग्लैंड में टर्की 1500 के दशक में विलियम स्ट्रिकलैंड नाम के व्यापारी द्वारा सीधे अमेरिका से लाया गया। इसलिए अंग्रेजों ने इसे किसी और देश से नहीं जोड़ा- बस कह दिया Turkey।
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दिलचस्प बात यह है कि पहले इंग्लैंड में गिनी फाउल को टर्की कॉक कहा जाता था, क्योंकि वह तुर्की के रास्ते व्यापार में आई थी। बाद में असली टर्की आई और नाम उसी का रह गया।
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स्पेनिश में Pavo (मोर से निकला नाम), इतालवी में Tacchin (पक्षी की आवाज से), जर्मन में Truthuhn ('ट्रुट-ट्रुट' आवाज से प्रेरित), चीनी (मंदारिन) में Huo Ji यानी 'फायर चिकन', जापानी/कोरियाई में 'सात चेहरे वाला पक्षी', और फारसी में Booghalamoon (रंग बदलने वाला)।
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जहां यह पक्षी असल में पैदा हुआ, वहां आज भी इसे कहा जाता है Guajolote, जो सीधे एजटेक भाषा से आया नाम है।
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