Jan 20, 2026

जापान में रिश्ते भी होते हैं ‘हायर’! एक्टर्स निभाते हैं आपके परिवार के रोल

Archana Keshri

जापान अपनी अनोखी सामाजिक व्यवस्थाओं और कामकाजी संस्कृति के लिए जाना जाता है। लेकिन यहां एक ऐसी इंडस्ट्री भी है, जो दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए चौंकाने वाली हो सकती है। जापान में लोग जरूरत पड़ने पर परिवार के सदस्य, दोस्त, जीवनसाथी या सहकर्मी तक किराए पर ले सकते हैं।

Source: pexels

खास बात यह है कि सामने वाला व्यक्ति कभी जान भी नहीं पाता कि जिससे वह मिल रहा है, वह असल में एक एक्टर है। यह व्यवस्था धोखा देने के इरादे से नहीं, बल्कि समाज के दबाव और भावनात्मक जरूरतों से जन्मी है।

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जापानी समाज में पारिवारिक छवि, सामाजिक प्रतिष्ठा और 'सब कुछ ठीक है' दिखाना बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में जब असल जिंदगी इस छवि से मेल नहीं खाती, तो लोग किराए के रिश्तों का सहारा लेते हैं।

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किराए के रिश्तों का चलन कैसे शुरू हुआ

जापान में कई कंपनियां हैं, जो इस तरह की सेवाएं देती हैं। इनमें सबसे मशहूर नाम है ‘फैमिली रोमांस’। इस कंपनी के जरिए लोग कुछ घंटों से लेकर कई सालों तक के लिए रिश्ते किराए पर ले सकते हैं।

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कोई शादी में जीवनसाथी दिखाने के लिए एक्टर बुलाता है, तो कोई ऑफिस पार्टी में दोस्त या सहकर्मी के रूप में। यहां तक कि बच्चों के स्कूल फंक्शन में माता या पिता की भूमिका निभाने के लिए भी एक्टर उपलब्ध हैं।

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क्यों लेते हैं लोग ऐसी सेवाएं

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है सामाजिक अपेक्षाएं। जापान में तलाक, अकेलापन या फेमिली ब्रेकडाउन को आज भी सहज नजरों से नहीं देखा जाता। कई लोग सहकर्मियों या पड़ोसियों की नजरों से बचने के लिए 'परफेक्ट फैमिली' की तस्वीर पेश करना चाहते हैं।

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इसके अलावा, भावनात्मक खालीपन भी एक बड़ी वजह है। अकेलेपन से जूझ रहे लोग कुछ समय के लिए ही सही, किसी अपने की मौजूदगी महसूस करना चाहते हैं। किराए का रिश्ता उन्हें यह एहसास दिला देता है कि वे अकेले नहीं हैं।

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आठ साल तक निभाया पिता का किरदार

फैमिली रोमांस के संस्थापक इशई युइची (Ishii Yuichi) खुद कई बार अलग-अलग किरदार निभा चुके हैं। एक मामले में एक महिला ने उन्हें अपनी बेटी के लिए उसके गायब पिता का किरदार निभाने के लिए रखा। युइची आठ साल तक उस बच्ची से मिलते रहे, उसके साथ खाना खाते, घूमने जाते और पिता की तरह व्यवहार करते रहे।

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हैरानी की बात यह है कि बच्ची को कभी पता ही नहीं चला कि वह व्यक्ति उसका असली पिता नहीं था। इस सेवा का मकसद मां और बेटी के जीवन में भावनात्मक स्थिरता लाना था।

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नकली या जरूरत का सहारा

बाहरी नजर से यह सब नकली या बनावटी लग सकता है, लेकिन जापान में कई लोग इसे भावनात्मक सहारे के रूप में देखते हैं। यह उन रिश्तों का विकल्प नहीं है, जो जीवन में स्वाभाविक रूप से बनने चाहिए, लेकिन कई बार परिस्थितियां लोगों को ऐसे रास्ते अपनाने पर मजबूर कर देती हैं।

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जापान में किराए के रिश्तों की यह दुनिया समाज के उस चेहरे को दिखाती है, जहां अकेलापन, दबाव और परफेक्शन की चाह इंसान को असामान्य समाधान की ओर ले जाती है। यह व्यवस्था सही है या गलत, इस पर बहस हो सकती है, लेकिन इतना तय है कि यह आधुनिक समाज की गहरी भावनात्मक जरूरतों को उजागर करती है।

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