Jan 15, 2026

क्या मोबाइल टावर रेडिएशन से मर रहे हैं पक्षी? जानिए वैज्ञानिक सच्चाई

Archana Keshri

पिछले कुछ वर्षों से सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर यह दावा बार-बार किया जाता रहा है कि मोबाइल टावरों की रेडिएशन (4G/5G) के कारण पक्षी बड़ी संख्या में मर रहे हैं।

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कई लोग इसे इतना सच मानने लगे हैं कि मोबाइल टावरों को ही पक्षियों की घटती संख्या का जिम्मेदार ठहराने लगे हैं। लेकिन विज्ञान क्या कहता है? आइए, तथ्यों के आधार पर समझते हैं।

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मोबाइल टावर रेडिएशन का विज्ञान

मोबाइल टावरों से निकलने वाली रेडिएशन Non-Ionizing Radiation होती है। इसका मतलब है इसमें इतनी ऊर्जा नहीं होती कि यह DNA को नुकसान पहुंचा सके, कोशिकाओं (Cells) को मार सके, कैंसर या तुरंत मौत का कारण बने।

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वैज्ञानिक अध्ययनों और WHO (World Health Organization) के अनुसार, मोबाइल नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाली रेडियो वेव्स मानव और पक्षियों दोनों के लिए घातक नहीं होतीं, जब वे तय अंतरराष्ट्रीय मानकों के भीतर हों।

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तो फिर पक्षी क्यों मर रहे हैं?

पक्षियों की घटती आबादी के पीछे असली वजह मोबाइल टावर नहीं, बल्कि कृषि में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक (Pesticides) हैं।

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कैसे?

कैसे?

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हैबिटैट लॉस: एक और बड़ा कारण

इसके अलावा पक्षियों के लिए सबसे बड़ा खतरा है तेज शहरीकरण, जंगलों की कटाई, पेड़ों और घोंसलों की कमी, और जलवायु परिवर्तन (Climate Change)। इन कारणों से पक्षियों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है, जिससे वे न तो सुरक्षित रह पा रहे हैं और न ही प्रजनन कर पा रहे हैं।

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5G/4G और पक्षियों की मौत: सच या अफवाह?

सच यह है कि अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक अध्ययन यह साबित नहीं करता कि 4G या 5G नेटवर्क पक्षियों की सामूहिक मौत का कारण है। यह दावा ज्यादातर अफवाह और गलत सूचना (Misinformation) पर आधारित है।

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अगर सच में पक्षियों को बचाना है तो क्या करें?

कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक, जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा, पेड़ लगाना और प्राकृतिक आवास बचाना, जल स्रोतों की सुरक्षा, और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित जागरूकता फैलाना।

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