Jan 21, 2026

जब चर्च में बोलने लगा AI, स्विस चर्च का अनोखा प्रयोग

Archana Keshri

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल नौकरियों, शिक्षा और यात्रा तक सीमित नहीं रहा। अब यह इंसानी आस्था और धर्म के सबसे संवेदनशील क्षेत्र में भी दस्तक दे चुका है। स्विट्जरलैंड के सबसे पुराने चर्चों में से एक ने हाल ही में एक अनोखा प्रयोग किया है, जिसका नाम रखा गया- 'Deus in Machina'।

Source: pexels

इस प्रयोग के तहत चर्च के कन्फेशनल बूथ (पाप स्वीकार करने की जगह) में एक ‘डिजिटल जीसस’ को स्थापित किया गया। यहां आने वाले लोग बूथ में बैठकर अपनी भाषा में अपने सवाल, शंकाएं, दुख, प्रेम, विश्वास या जीवन से जुड़ी परेशानियां शेयर कर सकते थे।

Source: pexels

इसके जवाब में सामने स्क्रीन पर मौजूद एक AI अवतार, यीशु मसीह के रूप में, धार्मिक ग्रंथों और प्रशिक्षण डेटा के आधार पर मार्गदर्शन देता था।

Source: pexels

क्या था प्रयोग का उद्देश्य?

चर्च प्रशासन का कहना था कि इस प्रयोग का मकसद यह समझना था कि एक वर्चुअल धार्मिक व्यक्तित्व लोगों के आस्था, संदेह, शोक, प्रेम और रोजमर्रा की चिंताओं जैसे विषयों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है। यह देखने की कोशिश की गई कि क्या तकनीक आध्यात्मिक संवाद का माध्यम बन सकती है।

Source: pexels

लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

कुछ आगंतुकों ने इस अनुभव को सोचने पर मजबूर करने वाला और आत्ममंथन कराने वाला बताया। उनका कहना था कि AI के जवाब शांत, संतुलित और आत्मनिरीक्षण को प्रेरित करने वाले थे। लेकिन ज्यादातर लोगों की प्रतिक्रिया बेहद तीखी रही।

Source: pexels

कई लोगों ने इसे ईशनिंदा (Blasphemy) करार दिया। आलोचकों का कहना है कि धर्म और आस्था को एल्गोरिद्म में बदलना खतरनाक है। उनका डर है कि AI अब इंसान की पहचान, भावनाओं और विश्वास तक में दखल देने लगा है।

Source: pexels

धर्म में AI: सुविधा या खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रयोग एक बड़े सवाल को जन्म देता है- क्या AI आध्यात्मिक मार्गदर्शन दे सकता है? या फिर यह मानवीय अनुभवों को मशीनों तक सीमित करने की शुरुआत है? धर्म सदियों से मानवीय संवेदनाओं, अनुभवों और नैतिक मूल्यों पर आधारित रहा है। ऐसे में एक मशीन द्वारा ‘ईश्वर का प्रतिनिधित्व’ करना कई लोगों को असहज कर रहा है।

Source: pexels

भविष्य की झलक?

यह प्रयोग भले ही अस्थायी हो, लेकिन इसने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में तकनीक और आस्था के टकराव और भी गहरे हो सकते हैं। सवाल यह नहीं है कि AI क्या कर सकता है, बल्कि यह है कि उसे क्या करना चाहिए।

Source: pexels

नजरें हैं तेज? तो 10 सेकंड में ढूंढिए 5000 के बीच छिपा 4000