Feb 04, 2026
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान कपूर भी जलाया जाता है। आइए जानते हैं इसका क्या महत्व है:
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कपूर पूरी तरह से अग्नि और धुएं में बदल जाता है। उसकी राख तक नहीं बचती। यह बुरी आदतों, नकारात्मक विचारों और अहंकार को जलाकर पूरी तरह पवित्र होना का प्रतीक माना जाता है
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परिवर्तन कपूर पूरी तरह से धुएं में विलीन हो जाता है जो अहंकार, वासनाओं और सांसारिक मोह माया को जला देने का प्रतीक है।
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वातावरण मान्यताओं के अनुसार कपूर को जलाने से वातावरण शुद्ध होता है। इसकी सुगंध नकारात्मक शक्तियों को दूर कर मन को शांत करती है।
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कपूर की आरती का अर्थ ज्ञान, आत्मा और आशा के लिए मार्गदर्शन से जोड़ा गया है। यह भक्ति, प्रेम और इच्छा का प्रतीक माना जाता है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस तरह कपूर पूरी तरह जल जाता है उसी तरह मनुष्य को भी अहंकार, ईर्ष्या और घमंड जैसी बुराइयों को जलाकर खत्म कर देना चाहिए।
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इसके पीछे का विज्ञान विज्ञान के अनुसार जब कपूर जलाने से आसपास के वातावरण को शुद्ध होता जाता है। हवा में मौजूद जीवाणुओं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
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