ISIS की दुल्हन के नाम से मशहूर शमीमा बेगम एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। ब्रिटेन में नागरिकता देने से इनकार और उनके मामले को लेकर हो रही बहस ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। आइए जानते हैं शमीमा बेगम के जीवन की कहानी और इससे जुड़े विवादों के बारे में।
शमीमा बेगम का जन्म 1999 में लंदन में हुआ था। उनके माता-पिता बांग्लादेशी मूल के हैं। 2015 में, जब शमीमा सिर्फ 15 साल की थीं, वे अपने दो दोस्तों (अमीरा अबासे और कदीजा सुल्ताना) के साथ स्कूल से भागकर सीरिया चली गईं।
वहां उन्होंने आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) में शामिल होकर एक ISIS लड़ाके से शादी कर ली। इसके बाद उनके तीन बच्चे हुए, लेकिन कोई भी जीवित नहीं बचा।
2019 में, जब ISIS के प्रभाव को खत्म कर दिया गया, तो शमीमा को सीरिया के एक हिरासत शिविर में रखा गया। उसी वर्ष, ब्रिटेन सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए उनकी ब्रिटिश नागरिकता रद्द कर दी।
ब्रिटेन का तर्क था कि शमीमा वंशानुगत रूप से बांग्लादेश की नागरिक हैं और उनकी नागरिकता रद्द करने से वे राज्यविहीन नहीं होंगी। हालांकि, बांग्लादेश ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
शमीमा ने अपनी नागरिकता बहाल कराने के लिए कई बार अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि वे मानव तस्करी और यौन शोषण की शिकार हुई थीं। हालांकि, ब्रिटेन की अदालतों ने होम सेक्रेटरी के फैसले का समर्थन किया और इसे वैध ठहराया।
2024 में अपील न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि शमीमा ने ISIS में शामिल होने का सोचा-समझा फैसला लिया था, भले ही वे दूसरों के प्रभाव में आई हों। शमीमा बेगम के वकील उन्हें सीरिया से ब्रिटेन वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, ब्रिटेन सरकार और सुरक्षा एजेंसियां चिंतित हैं कि ऐसा करने से कट्टरपंथियों की वापसी का रास्ता खुल सकता है। यह सामाजिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
शमीमा वर्तमान में सीरिया के एक हिरासत शिविर में हैं। वे ब्रिटेन लौटने की अनुमति पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। उनकी स्थिति और उनके वापस ब्रिटेन लौटने की संभावनाओं पर विवाद जारी है।