क्या है ब्रिटेन का Infected blood scandal, 30 हजार लोग हुए थे HIV संक्रमित!

ब्रिटेन ब्लड स्कैंडल से पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है। एक रिपोर्ट ने अपनी जांच में यूके के दशकों पुराने ब्लड स्कैंडल का खुलासा किया है। इसमें संक्रमित खून से इलाज के बाद हजारों लोगों की मौत हो गई थी।

ब्लड स्कैंडल रिपोर्ट के अनुसार, 1970 और 1990 के दशक की शुरुआत के बीच ब्रिटेन में दूषित खून चढ़ाने के बाद 30,000 से भी अधिक लोग HIV और हेपेटाइटिस जैसे वायरस से संक्रमित हो गए थे। उस दौरान अगर सही कदम उठाया गया होता तो काफी हद तक इसे टाला जा सकता था।

इस रिपोर्ट सामने आने के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने मांफी मांगते हुए प्रभावित लोगों और मरने वाले परिवारों को मुआवजा देने का वादा किया है।

ये है पूरा मामला

ये मामला 1970 से 1990 के दशक के बीच का है और इसमें वो लोग शामिल थे जिन्हें दुर्घटनाओं, सर्जरी या डिलीवरी के बाद ब्लड या प्लाज्मा चढ़ाया गया था। इस दौरान इन लोगों को संक्रमित खून चढ़ाया गया जिससे खतरनाक बीमारियां फैली।

हर चार दिन में हुई मौत

एक अनुमान के मुताबिक, हर चार दिन में संक्रमित खून के चलते एक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी। इसके अलावा संक्रमित खून चढ़ाए जाने के चलते 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और अन्य को आजीवन स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ा।

NHS ही नहीं सरकारों ने भी छुपाई थी सच्चाई

ये नेशनल हेल्थ सर्विस (National Health Service) की सबसे बड़ी लापरवाही थी। यहां तक कि सरकारों ने भी इस सच्चाई को छुपाया था।

किसने दिया था जांच का आदेश

पीड़ितों और उनके परिवारों की सालों की मांग के बाद ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने साल 2017 में इस मामले में जांच के आदेश दिए थे। उस दौरान संक्रमित ब्लड चढ़ाने की वजह से 2,400 लोगों के मौत हुई थी जो अब बढ़कर 3 हजार से अधिक हो गई है।

कैसे हुआ स्कैंडल

दरअसल, 70 के दशक में एनएचएस ने हीमोफीलिया के लिए फैक्टर VIII नामक एक नए उपचार का उपयोग शुरू किया गया। इसमें लापता क्लॉटिंग एजेंट को मानव रक्त प्लाज्मा से बदलना था।

फैक्टर कॉन्संट्रेट बनाने के लिए निर्माताओं ने हजारों लोगों के प्लाज्मा को इकट्ठा किया, जिसमे कॉन्संट्रेट में हेपेटाइटिस और एचआईवी सहित वायरस से संक्रमित खून होने का खतरा बढ़ गया।

हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों का इलाज ब्रिटिश और अमेरिकी ब्लड प्रोडक्ट्स से किया जाता था। यूके-निर्मित फैक्ट कंसंट्रेट की कमी के चलते डॉक्टर अमेरिका से आयात पर निर्भर थे जहां जेलों में लोगों को संक्रमण होने के जोखिम के बावजूद उनसे ब्लड लिया जाता था।

इन्हीं कारणों के चलते ब्रिटेन के लोगों को गंदा खून दिया गया जिसके चलते ये बीमारियां फैली और लोगों की जान तक चली गई। वहीं, सरकार ने करीब 4 हजार संक्रमित लोगों को एक लाख यूरो का मुआवजा दिया है। बाकी पीड़ितों को भी जल्द ही मुआवजा दिया जाएगा।