11 जुलाई 2006 का दिन मायानगरी मुंबई के लोगों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। इस दिन मुंबई में एक नहीं बल्कि 7 बम धमाके हुए थे।
11 मिनट में लोकल ट्रेनों में लगातार 7 बम धमाकों से मुंबई दहल उठी थी। इस धमाके में 189 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 824 लोग घायल हो गए थे।
इन धमाकों के नौ साल बाद साल 2015 में कोर्ट ने 13 आरोपियों में से 12 को दोषी ठहराया था। जिनमे से पांच आरोपियों को फांसी की सजा और सात को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
इन्हीं में से एक दोषी मोहम्मद साजिद मरगूब अंसारी जेल में रहते हुए मुंबई के एक कॉलेज से लॉ की पढ़ाई कर रहा है। उसी पढ़ाई को पूरा करने के लिए अंसारी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
हाल ही में अंसारी ने कोर्ट से कानून परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति मांगी। अंसारी ने दक्षिण मुंबई में सिद्धार्थ लॉ कॉलेज द्वारा 3 मई से 15 मई तक आयोजित दूसरे सेमेस्टर की कानून परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति मांगी थी।
10 मई को अंसारी ने एक आवेदन देकर कहा कि वह 3 और 9 मई को होने वाली परीक्षा में शामिल नहीं हो पाया, क्योंकि उसे समय पर कॉलेड नहीं ले जाया जा सका था।
दरअसल, कोर्ट ने अंसारी को शारीरिक रूप से परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी थी और नासिक सेंट्रल जेल अधिकारियों को परीक्षा की तारीखों पर उसे कॉलेज ले जाने का निर्देश दिया था। लेकिन जेल अधिकारी अंसारी को समय पर कॉलेज नहीं ले जा सके।
ऐसे में अब सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई यूनिवर्सिटी से पूछा है कि क्या दोषी ऑनलाइन कानून की परीक्षा दे सकता है? इसके साथ ही कोर्ट ने मुंबई यूनिवर्सिटी को ऐसे उम्मीदवारों को ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा देने की अनुमति देने पर अपना रुख साफ करने का भी निर्देश दिया है।