ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत होने की बात सामने आई है। उनके साथ ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियत और 7 अन्य ईरानी अधिकारियों और बॉडीगार्ड्स की मौत हो गई।
रईसी अजरबैजान की यात्रा पर थे जब वहां से लौटते समय उनका हेलीकॉप्टर अजरबैजान सीमा के पास जोल्फा शहर के उत्तर-पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र में क्रैश हो गया।
हादसे की प्राथमिक वजह घना कोहरा और खराब मौसम बताया जा रहा है। यह हादसा 19 अप्रैल को हुआ था, जिसके 17 घंटे बाद हेलिकॉप्टर का सुराग मिला।
बता दें, इब्राहिम रईसी ने साल 2021 में राष्ट्रपति का पद संभाला था। 62% वोट हासिल करके वो राष्ट्रपति के पद पर काबिज हुए थे।
हालांकि, राष्ट्रपति बनने से पहले भी वो कई अहम पदों पर रहे। इस दौरान उनके साथ कई विवाद भी जुड़े। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद रईसी ने सरकार में पैठ बना ली थी।
ईरान में राजशाही के खत्म होने के बाद उन्होंने कट्टर इस्लामी या शरिया कानून पर आधारित एक नई राजनीतिक व्यवस्था स्थापित की। उनके ही कार्यकाल में महिलाओं की शादी की उम्र 13 से घटाकर 9 साल कर दी गई थी।
उनके कार्यकाल के दौरान सितंबर 2022 में महिलाओं के ड्रेस से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार महिला महसा अमिनी की हिरासत में मौत के बाद ईरान में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे।
इस प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों लोग मारे गए और हिजाब कानून के उल्लंघन करने के बाद कई महिलाओं को मौत की भी सजा दी गई।
वहीं, साल 1988 में ईरान-इराक युद्ध के दौरान रईसी 4 सदस्यों की एक ऐसी समिति के सदस्य भी रहे थे जिसे 'डेथ कमेटी' के नाम से जाना जाता था।
इस कमेटी ने उन कैदियों पर दोबारा मुकदमा चलाया जो अपनी राजनीतिक गतिविधियों के चलते पहले से ही जेल की सजा काट रहे थे।
बताया जाता है कि ये कैदी पीपल्स मुजाहिदीन ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरान के सपोर्टर थे। ये लोग ईरान में वामपंथ की वकालत करते थे। इन्हीं लोगों को मौत की सजा दे दी गई।
मनमाने ढंग से हजारों कैदियों को मौत की सजा देने के चलते ही इब्राहिम रईसी को 'बुचर ऑफ तेहरान' यानी 'तेहरान का कसाई' कहा जाता है।
एमनेस्टी के अनुसार मौत की सजा पाने वालों की संख्या लगभग 5 हजार थी। वहीं, मानवाधिकार संगठन इनकी संख्या करीब 30 हजार बताता है।