नोट्रे डेम कैथोलिक चर्च जिसे नोट्रे डेम कैथेड्रल के नाम से भी जाना जाता है, पेरिस, फ्रांस में स्थित एक प्रमुख कैथोलिक चर्च है। यह कैथेड्रल न केवल अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी अद्भुत गॉथिक वास्तुकला और सांस्कृतिक धरोहर के कारण यह विश्वभर में जाना जाता है।
15 अप्रैल 2019 को एक भयंकर आग ने नोट्रे डेम कैथेड्रल को नुकसान पहुंचा दिया था। यह आग चर्च के गुंबद और छत को पूरी तरह से नष्ट कर दी थी, जिससे लाखों डॉलर का नुकसान हुआ।
हालांकि, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे पुनर्निर्मित करने का वादा किया और इस ऐतिहासिक स्थल को फिर से पुनर्जीवित कर दिया है। अब, पांच साल बाद, नोट्रे डेम कैथेड्रल को फिर से जनता के लिए खोला जा चुका है।
बता दें, नोट्रे डेम कैथेड्रल का निर्माण 1163 ईस्वी में बिशप मॉरिस डी सुली के नेतृत्व में शुरू हुआ था, और यह 1260 ईस्वी तक पूरा हुआ। यह चर्च विशेष रूप से वर्जिन मैरी के सम्मान में बनाया गया था।
यह चर्च पेरिस के इल डे ला सिटी नामक द्वीप पर स्थित है, जो शहर के केंद्र में है। नोट्रे डेम कैथेड्रल को फ्रांसीसी गॉथिक वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है। इसकी आर्किटेक्चर में फ्लाइंग बट्रेस, रिब वॉल्ट्स, ह्यूज रोज विंडोज और सुंदर मूर्तिकला सजावटें शामिल हैं।
यह आर्किटेक्चरल स्टाइल रोमांटिक स्टाइल से काफी अलग है, और इसका उद्देश्य चर्च को विशाल और भव्य बनाना था ताकि उसमें अधिक से अधिक डिवोटी पूजा करने आ सकें। लेकिन क्या आप जानते हैं फ्रांसीसी क्रांति (1789-1790) के दौरान भी नोट्रे डेम कैथेड्रल का काफी नुकसान पहुंचाया गया था।
इस दौरान चर्च के रिलीजियस पेंटिंग्स और मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया, और चर्च को एककॉमन पब्लिक प्लेस में बदल दिया गया था। हालांकि, साल 1831 में, फ्रांसीसी लेखक विक्टर ह्यूगो द्वारा लिखित उपन्यास 'नोट्रे डेम डी पेरिस' ने चर्च की अहमियत को फिर से लोगों के बीच लाकर इसे बचाने का प्रयास किया।
इस उपन्यास के बाद, चर्च के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई, जो 1844 से 1864 तक चली और प्रसिद्ध आर्किटेक्ट यूजीन वियोलेट-ले-डुक द्वारा किया गया। 19वीं सदी में, नोट्रे डेम कैथेड्रल कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी बना है। यहां नेपोलियन बोनापार्ट का राज्याभिषेक हुआ और फ्रांसीसी गणराज्य के कई प्रमुख राष्ट्रपति का अंतिम संस्कार भी यहां हुआ।