Mahakumbh 2025: भारी भीड़ से सजा संगम, तस्वीरों में दिखा अद्भुत नजारा

प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में 13 जनवरी 2025 से महाकुंभ का शुभारंभ हो चुका है। हिंदू धर्म का यह सबसे बड़ा आयोजन न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर से श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रहा है।

पौष पूर्णिमा के अवसर पर लाखों भक्तों ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई और भक्ति के इस महासागर में लीन हो गए।

यह महाकुंभ विशेष इसलिए भी है क्योंकि इसे 144 वर्षों के बाद दुर्लभ खगोलीय संयोग में आयोजित किया जा रहा है।

पौष पूर्णिमा के दिन महाकुंभ के पहले स्नान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। त्रिवेणी संगम पर तंबुओं का एक नया शहर बस चुका है, जहां देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए हैं।

घाटों पर भक्ति का ऐसा दृश्य नजर आया जो अविस्मरणीय है। भक्त राम नाम का जाप करते हुए संगम की पवित्र धारा में डुबकी लगाते दिखे।

हर तरफ भक्ति की लहर, मंत्रों का उच्चारण, और श्रद्धालुओं की उमंग ने इस महापर्व को और भी भव्य बना दिया।

महाकुंभ 2025 में इस बार जर्मनी, रूस, ब्राजील और अमेरिका जैसे 20 से अधिक देशों से श्रद्धालु पहुंचे हैं। सनातन धर्म को अंगीकार कर चुके कई विदेशी साधु-संतों ने भी संगम में स्नान किया।

महाकुंभ के साथ ही कल्पवास का भी शुभारंभ हो गया है। कल्पवासी 45 दिनों तक संगम के किनारे रहकर कठोर नियमों का पालन करते हैं।

वे संगम में स्नान कर सकल विश्व के कल्याण और मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दौरान वे ध्यान, जप, तप और भक्ति में लीन रहते हैं।

इस महापर्व के आयोजन के लिए प्रशासन ने चाक-चौबंद व्यवस्था की है। मेला क्षेत्र में 60 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।

ड्रोन, बम निरोधक दस्ते, और एनएसजी कमांडो के साथ उच्च स्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। पुलिसकर्मी और स्वयंसेवक मेला क्षेत्र में व्यवस्था संभाल रहे हैं।

महाकुंभ का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अनंत है। मान्यता है कि यहां स्नान करने से जीवन के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर स्नान को लेकर जो आस्था और श्रद्धा दिखाई देती है, वह इस आयोजन को अद्वितीय बनाती है।