मौसम का तापमान कैसे मापा जाता है?

उत्तर भारत में इस वक्त गर्मी का प्रचंड रूप देखने को मिल रहा है। दिल्ली में तो नया रिकॉर्ड बना है। बुधवार को देश की राजधानी के मंगेशपुर में पारा 52.9 पहुंच गया।

हालांकि, मौसम विभाग इसे लेकर थोड़ा असमंजस में है जिस पर अब जांच होगी कि यह आंकड़ा सही है या नहीं। ऐसे में आइए जानते हैं मौसम का तापमान कैसे मापा जाता है:

मौसम विज्ञान विभाग कई उपकरणों की मदद से तापमान को मापता है। सटीक तापमान का पता लगाने के लिए स्टीवेन्सन स्क्रीन का इस्तेमाल किया जाता है।

इस मशीन का उपयोग विश्व भर में अधिकतम, न्यूनतम तापमान और आर्द्रता को मापने के लिए होता है। ये बॉक्स के आकार का होता है जिसके अंदर चार थर्मामीटर ड्राई बल्ब (DB), वेट बल्ब (WB), अधिकतम और न्यूनतम होते हैं। वहीं, बॉक्स का रंग सफेद होता है।

स्क्रीन को खुली हवा में जमीन से लगभग 4 फीट की ऊंचाई पर रखा जाता है और इसका फेसिंग उत्तर दिशा की ओर होता है ताकी सूर्य की किरणें सीधे उसके अंदर न पड़े। थर्मामीटर को सीधे सूर्य की रोशनी या किसी भी गर्मी के स्रोत के पास नहीं रखा जाता है।

अधिकतम तापमान थर्मामीटर सुबह 8:30 बजे सेट किया जाता है। फिर दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे के बीच स्क्रीन अधिकतम तापमान रिकॉर्ड करती है। मिनिमम टेंपरेचर सुबह साढ़े आठ बजे मापा जाता है।

वहीं, चरम पर पहुंचने पर यह एक विशेष डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहता है जिसे एक पर्यवेक्षक हर दिन शाम साढ़े 5 बजे मैन्युअल रूप से रिकॉर्ड करता है।

इसके अलावा ह्यूमिडिटी मापने के लिए ड्राई बल्ब और वेट बल्ब का उपयोग किया जाता है। ये सुबह 5:30 बजे से चौबीसों घंटे तक शुष्क और गीली हवा का मापन करते हैं।

इन्हीं थर्मामीटरों की मदद से आसानी से पता चल जाता है कि किस स्थान पर कितनी ह्यूमिडिटी है। बता दें कि, स्टीवेन्सन स्क्रीन को स्कॉटिश सिविल इंजीनियर थॉमस स्टीवेन्सन ने डिजाइन किया था और साथ ही उन्होंने ही लाइटहाउस भी डिजाइन किया था।