भारत में एक के बाद एक पेपर लीक के कई मामले सामने आए हैं। इसमें सबसे गंभीर मामला मेडिकल एंट्रेस के लिए आयोजित होने वाले NEET का माना जा रहा है।
ऐसे में पेपर लीक पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में एंटी पेपर लीक कानून लागू कर दिया है। पेपर लीक और नकल रोकने के लिए इस साल फरवरी में यह कानून पारित किया गया था।
पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने आधी रात को इसका नोटिफिकेशन जारी किया और कहा गया कि इसे 21 जून से तत्काल प्रभाव से लागू किया जाता है।
नोटिफिकेशन के अनुसार पेपर लीक करने या आंसर शीट के साथ छेड़छाड़ करने पर 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
वहीं, ऑर्गेनाइज्ड क्राइम होने पर दोषियों को पांच से 10 साल की कैद और 1 करोड़ का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा दूसरे कैंडिडेट के स्थान पर परीक्षा देने के मामले में दोषी पाए जाने पर अपराधी के खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है।
कानून के तहत उस एग्जामिनेशन सर्विस प्रोवाइडर पर भी कार्रवाई हो सकती है जिसे परीक्षा के दौरान गड़बड़ी का अंदाजा था लेकिन उसने इसे रोकने के लिए कुछ नही किया।
बता दें, इस कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे यानी आरोपी को जमानत भी नहीं मिलेगी। इतना ही नहीं जो संस्था पेपर लीक में शामिल होगा उसकी संपत्ति को नष्ट तो किया ही जाएगा साथ ही परीक्षा का पूरा खर्च भी उसी से वसूला जाएगा।
हालांकि, इन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल परीक्षार्थी या उम्मीदवारों को इस कानून के दायरे में शामिल नहीं किया गया है और उन पर कोई कार्रवाई का प्रावधान नहीं है। जब संसद में इस बिल पेश किया गया था तो उस वक्त केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था कि इस कानून का उद्देश्य केवल ऐसे लोगों को रोकना है, जो धांधली करके बच्चों-युवाओं और देश के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।