Mar 22, 2025
अगर आप पुराने घरों, हवेलियों या गांव के मकानों को गौर से देखेंगे, तो पाएंगे कि उनके दरवाजे दो पल्लों वाले होते थे। जबकि आजकल के आधुनिक घरों में सिंगल पल्ले वाले दरवाजे ज्यादा देखने को मिलते है।
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कभी आपने सोचा है कि पुराने समय में घरों में दो पल्ले वाले दरवाजे क्यों बनाए जाते थे? इसके पीछे कई दिलचस्प और व्यावहारिक कारण छिपे हैं, जो न केवल वास्तुशास्त्र से जुड़े हैं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं।
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पुराने समय में घर बड़े और खुले हुआ करते थे। बिजली की सुविधा भी हर जगह नहीं थी, इसलिए घरों में प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवाह बनाए रखने के लिए दो पल्ले वाले दरवाजे बनाए जाते थे। इन्हें आधा खोलकर रखा जा सकता था, जिससे घर में ताजा हवा आती रहती थी और अंदर ठंडक बनी रहती थी।
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गर्मियों में जब तापमान बढ़ता था, तो घर को ठंडा रखने के लिए लोग दरवाजों के दोनों पल्लों को खोलकर रखते थे, जिससे क्रॉस-वेंटिलेशन होता था और गर्म हवा बाहर निकल जाती थी। वहीं, सर्दियों में दोनों पल्ले बंद करके ठंडी हवाओं से बचाव किया जाता था।
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पुराने जमाने में लोग अपने घरों में बड़े-बड़े लकड़ी के फर्नीचर, बैलगाड़ी के पहिए, अनाज के बड़े-बड़े बोरे और अन्य भारी सामान रखते थे। सिंगल दरवाजे से इनका आना-जाना मुश्किल होता, इसलिए चौड़े और दो पल्ले वाले दरवाजे बनाए जाते थे ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें पूरा खोला जा सके और सामान आसानी से अंदर-बाहर किया जा सके।
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गांवों में लोग अपने मवेशियों को घर में रखते थे, खासकर गाय, बैल और बकरियां। ऐसे में, संकरी चौखट वाले दरवाजों से जानवरों का निकलना मुश्किल हो सकता था। दो पल्लों वाले दरवाजों को खोलकर उन्हें आसानी से घर में प्रवेश दिया जा सकता था।
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पुराने समय में घरों में चोरों से सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा था। दो पल्ले वाले मजबूत लकड़ी के दरवाजे आसानी से नहीं टूटते थे और इन्हें भीतर से बंद करने के लिए मोटे लोहे के कड़े और सांकल का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे सुरक्षा पुख्ता हो जाती थी।
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हिंदू वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में प्रवेश द्वार बहुत महत्वपूर्ण होता है। दो पल्लों वाले दरवाजे को शुभ माना जाता था क्योंकि यह समृद्धि और शांति का प्रतीक होता था। यही कारण है कि आज भी कई मंदिरों और पारंपरिक घरों में दो पल्ले वाले दरवाजे बनाए जाते हैं।
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पुराने जमाने में मेहमानों का बहुत सम्मान किया जाता था और उनका स्वागत भव्य तरीके से किया जाता था। जब कोई खास अतिथि आता था, तो दरवाजे के दोनों पल्लों को खोल दिया जाता था, जिससे यह संकेत मिले कि मेहमान का स्वागत खुले दिल से किया जा रहा है।
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दो पल्ले वाले दरवाजों की डिजाइन इस तरह की होती थी कि वे अंदर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करते थे। गर्मियों में दरवाजे का ऊपरी हिस्सा खोलकर हवा को आने दिया जाता था, जबकि सर्दियों में दरवाजे को पूरी तरह से बंद कर दिया जाता था ताकि घर गर्म बना रहे।
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