May 25, 2024

फिट की बीमारी क्या है और कैसे कर सकते हैं इससे बचाव?

Archana Keshri

फिट शब्द का इस्तेमाल मिर्गी के दौरे के लिए किया जाता है। ये एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो मस्तिष्क में एबनॉर्मल इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी के कारण होता है।

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मस्तिष्क में गड़बड़ी होने के कारण व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं। इसकी वजह से व्यक्ति का दिमागी संतुलन पूरी तरह से गड़बड़ा जाता है और उसका शरीर लड़खड़ाने लगता है।

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मिर्गी का प्रभाव शरीर के किसी एक हिस्से पर देखने को मिल सकता है, जैसे चेहरे, हाथ या पैर पर। मिर्गी को एक नहीं बल्कि मोटे तौर पर चार तरह से बांटा जा सकता है। चलिए जानते हैं इसके प्रकार, लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे में।

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इन दोरों में तरह-तरह के लक्षण होते हैं, जैसे कि बेहोशी आना, गिर पड़ना, हाथ-पांव में झटके आना। इंसान कई कारणों से इस बीमारी की चपेट में आ सकता है। दिमाग में ऑक्सीजन की कमी होने पर भी मिर्गी का दौरा पड़ सकता है।

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इसके अलावा दिमाग पर चोट लगने या चोट के निशान रह जाने की वजह से भी अक्सर लोगों को मिर्गी का दौरा पड़ने लगता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसी गंभीर बीमारी, तेज बुखार या हृदय रोग की वजह से भी इंसान को ये बीमारी हो सकती है।

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मिर्गी का दौरा मुख्य तौर पर दो प्रकार का होता है। पहला है जनरलाइज्ड एपिलेप्सी, जिसमें दौरा पूरे दिमाग में पड़ता है। ये तब तक पड़ता है जब तक इंसान बेहोश न हो जाए।

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इस दौरे के दौरान इंसान का शरीर पूरी तरह से अकड़ जाता है। शरीर में भारी कंपन महसूस होता है। मूत्राशय और आंतों पर नियंत्रण खोने लगता है। जीभ दांतों तले दबने लगती है।

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दूसरा होता है फोकल एपिलेप्सी। इसमें दिमाग के कुछ हिस्सों में इलेक्ट्रिकल तरंगे दौड़ती हैं। इस दौरे में इंसान के सूंघने या चखने की शक्ति में बदलाव आ सकता है।

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मरीज देखने, सुनने या स्पर्श महसूस करने की क्षमता भी खो सकता है। इसके अलावा चक्कर आना, शरीर में झनझनाहट और अंगों में अचानक मरोड़ आना भी इसके लक्षण हैं।

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इस बीमारी से बचने के लिए कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। उदाहरण के लिए, पर्याप्त नींद लें, स्ट्रेस मैनेजमेंट सीखें, नशीली दवाओं और एल्कोहल से दूर रहें, कोशिश करें कि टीवी और कंप्यूटर के सामने ज्यादा देर तक न बैठें, तेज रोशनी से बचें और मेडिटेशन या कोई एक्सरसाइज जरूर करें।

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