Jan 16, 2026
सनातन धर्म में रुद्राक्ष का बेहद खास महत्व है। इसे बहुत ही पवित्र माना जाता है। लोग इसकी माला भी पहनते हैं।
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रुद्राक्ष धारण करने के कई लाभ हैं। लेकिन इसे अगर नियम के साथ नहीं पहना गया तो इसके लाभ नहीं मिलता है।
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शास्त्रों में रुद्राक्ष की माला का जाप बहुत फलदायी बताया गया है। जप करने से कई गुना अधिक फल मिलता है और अध्यात्मिक उन्नति होती है
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी। आइए जानते हैं शास्त्रों में रुद्राक्ष धारण करने के कौन-कौन से नियम बताए गए हैं।
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रुद्राक्ष को सीधा धारण नहीं करना चाहिए। सबसे पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करना चाहिए।
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इसके बाद शुभ मुहूर्त में 108 बार 'ऊं नमः शिवाय' का जाप करें। फिर इसकी प्राण प्रतिष्ठा करते हुए या मंदिर में शिवलिंग से स्पर्श कराने के बाद धारण करना चाहिए।
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रुद्राक्ष को धारण करने के लिए अमावस्या, पूर्णिमा, सावन, सोमवार या शिवरात्रि के दिन उत्तम माने गए हैं। पहना हुआ रुद्राक्ष नहीं धारण करना चाहिए।
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मान्यताओं के अनुसार नियमानुसार रुद्राक्ष धारण करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है। साथ ही मन शांत रहता है।
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रुद्राक्ष धारण करने से एकाग्रता बढ़ती है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा व बुरी नजर का प्रभाव दूर हो सकता है। मन में अशुद्ध और बुरे विचारों से छुटकारा मिल सकता है।
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