Feb 25, 2025

महाशिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहर क्यों की जाती है पूजा, महत्व और समय

Vivek Yadav

महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी को पूरे देश में मनाया जाएगा। इस दिन महादेव की पूजा-अर्चना की जाती है।

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महाशिवरात्रि में रात्रि पूजन का खास महत्व है। इस दिन शिवलिंग कू पूजा प्रदोष काल, निशीथ काल समेत रात के चार प्रहर में की जाती है। आइए जानते हैं रात्रि प्रहर पूजा का महत्व:

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रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शिव का पूजन और अभिषेक अलग-अलग तरह से किया जाता है।

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इस दिन प्रथम प्रहर की पूजा में भगवान शिव का जल की धारा से अभिषेक किया जाता है।

1– महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में शिवलिंग की जल की धारा से अभिषेक किया जाता है।

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महत्व मान्यता है कि शिव जी की प्रथम प्रहर में पूजा करने से आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। समय- शाम 6:19 से रात्रि 9:26 मिनट तक

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2. महाशिवरात्रि के द्वितीय प्रहर की पूजा में शिवलिंग का दही से अभिषेक किया जाता है।

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महत्व महाशिवरात्रि के द्वितीय प्रहर की पूजा को लेकर मान्यता है कि धन, सम्मान, शांति और सुख में वृद्धि होती है। समय- रात्रि 9:26 मिनट से मध्यरात्रि 12:34 मिनट के बीच

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3. तृतीय प्रहर में शिवलिंग का घी से अभिषेक किया जाता है।

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महत्व तृतीय प्रहर में भगवान शंकर की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्ट दूर होते हैं। समय- मध्यरात्रि 12:34 मिनट से मध्यरात्रि 3:41 मिनट के बीच

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4. चतुर्थ प्रहर की पूजा में शिवलिंग का शहद और जल की धारा से अभिषेक किया जाता है।

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