Feb 25, 2025
क्या आपने कभी सुना है कि कोई मुर्गा बिना सिर के 18 महीने तक जिंदा रह सकता है? यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन 'मिरेकल माइक' (Miracle Mike) नाम के एक मुर्गे ने इसे सच कर दिखाया था!
Source: life.com
साल 1945 में अमेरिका के कोलोराडो (Colorado) राज्य के फ्रूटा (Fruita) शहर में एक किसान ने अपने मुर्गे का सिर काटने की कोशिश की, लेकिन वह मरने के बजाय बिना सिर के ही 18 महीने तक जिंदा रहा।
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यह घटना इतनी अद्भुत थी कि माइक को पूरे देश में प्रसिद्धि मिली, और आज भी उसकी कहानी दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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फ्रूटा के किसान लॉयड ओल्सन (Lloyd Olsen) ने एक दिन अपने वायंडोट (Wyandotte) नस्ल के मुर्गे माइक को रात के खाने के लिए मारने की कोशिश की। उन्होंने कुल्हाड़ी से उसका सिर काट दिया, लेकिन उनकी काटने की स्थिति कुछ ऐसी थी कि माइक की गर्दन का एक हिस्सा, दिमाग का ब्रेनस्टेम (brainstem) और एक कान जुड़ा रह गया।
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ब्रेनस्टेम वह हिस्सा होता है जो स्वास्थ्य और संतुलन जैसे बुनियादी कार्यों को नियंत्रित करता है। यही वजह थी कि सिर कटने के बावजूद माइक जिंदा रहा और धीरे-धीरे इस स्थिति में खाने-पीने और चलने-फिरने में भी सक्षम हो गया।
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क्योंकि माइक के पास सिर नहीं था, इसलिए उसके मालिक ने उसे जीवित रखने के लिए एक आईड्रॉपर (eyedropper) की मदद से दूध, पानी और छोटे अनाज के टुकड़े उसकी गर्दन के खुले हिस्से में डालकर खिलाना शुरू कर दिया।
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साथ ही, उसे कीड़े और छोटे दाने भी खिलाए जाते थे। माइक का यह अनोखा जीवन उसे जल्द ही देशभर में मशहूर बना दिया और लोग उसे देखने के लिए लंबी-लंबी कतारें लगाने लगे।
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माइक की कहानी जंगल में आग की तरह फैल गई, और जल्द ही वह सर्कस और रोड शो का हिस्सा बन गया। उसे विभिन्न एग्जीबिशन्स में 'मिरेकल माइक – द हेडलेस चिकन' के नाम से दिखाया जाने लगा। वह Time और Life जैसी फेमस मैगजीन में भी छप चुका है।
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अमेरिका के कई शहरों में उसकी एग्जीबिशन्स आयोजित की गईं, जहां लोग टिकट खरीदकर उसे देखने आते थे। उसके मालिक को हर महीने करीब 4,500 डॉलर तक की कमाई होती थी, जो उस समय के हिसाब से बहुत बड़ी रकम थी।
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माइक की यह अनोखी स्थिति वैज्ञानिकों के लिए भी आश्चर्यजनक थी। कई एक्सपर्ट्स ने माइक की जांच की और निष्कर्ष निकाला कि जब माइक का सिर काटा गया, तो उसकी गर्दन की एक मुख्य नस (jugular vein) नहीं कटी, जिससे वह ज्यादा खून नहीं बहा और जिंदा बच गया।
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उसके दिमाग का एक हिस्सा, खासकर ब्रेनस्टेम, बचा रहा, जिससे उसकी फिजिकल एक्टिविटीज जारी रहीं। यह ब्रेनस्टेम ही सांस लेने, दिल की धड़कन को नियंत्रित करने और शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है।
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यह घटना साबित करती है कि जानवरों का शरीर कितनी अविश्वसनीय तरीके से काम कर सकता है और कुछ परिस्थितियों में असाधारण जीवन शक्ति दिखा सकता है।
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लगभग 18 महीने तक बिना सिर के जिंदा रहने के बाद, साल 1947 में माइक का निधन हो गया। एक रात, जब माइक और उसके मालिक एक होटल में ठहरे हुए थे, तो माइक अचानक अपने गले में खाना फंसने की वजह से दम घुटने से मर गया।
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उस समय मालिक के पास उसे बचाने के लिए आईड्रॉपर नहीं था, जिससे वे उसे साफ नहीं कर पाए। हालांकि, माइक की कहानी आज भी जीवित है और उसके शहर फ्रूटा (Fruita, Colorado) में हर साल 'Mike the Headless Chicken Day' नाम का एक उत्सव मनाया जाता है।
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आमतौर पर, जब किसी मुर्गे का सिर काटा जाता है, तो उसकी तंत्रिकाएं कुछ समय तक सक्रिय रहती हैं और उसका शरीर ज्यादा से ज्यादा 15 मिनटों तक हिलता-डुलता रह सकता है। लेकिन, माइक का 18 महीने तक जिंदा रहना बेहद दुर्लभ और अकल्पनीय घटना थी, क्योंकि उसमें ब्रेनस्टेम का हिस्सा बचा था, जो शरीर की क्रियाओं को नियंत्रित कर रहा था।
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