आज की तेज रफ्तार जिंदगी में मोबाइल, लैपटॉप और स्क्रीन का हमारी डेली रूटीन में अहम रोल है। लेकिन हर वक्त डिजिटल डिवाइसेज से जुड़े रहना धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक थकान की वजह बन रहा है।
इसे ही कहा जाता है "डिजिटल थकान", और इससे राहत पाने का सबसे असरदार तरीका है — डिजिटल डिटॉक्स।
डिजिटल डिटॉक्स का मतलब है कुछ समय के लिए स्क्रीन और इंटरनेट से दूरी बनाना। इसका मकसद है खुद को रीसेट करना, दिमाग को तरोताजा करना और फिर से असल जिंदगी से जुड़ना।
Forbes की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल डिटॉक्स मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, संतुलन बनाए रखने और प्रेरणा बढ़ाने में बेहद मददगार साबित हो सकता है।
मानसिक शांति का अनुभव - लगातार नोटिफिकेशन, ईमेल और सोशल मीडिया अलर्ट्स से दिमाग कभी भी पूरी तरह शांत नहीं हो पाता। लेकिन जब आप कुछ समय के लिए डिजिटल ब्रेक लेते हैं, तो एक तरह का सुकून और संतुलन महसूस होता है।
स्क्रीन से दूर रहकर आप अपने परिवार, दोस्तों और आसपास की दुनिया से बेहतर तरीके से जुड़ सकते हैं। इससे आत्मविश्वास और खुशी दोनों बढ़ते हैं।
जब आप एक समय में एक ही काम पर फोकस करते हैं, बिना किसी डिजिटल डिवाइस के ध्यान भटकाए, तो काम जल्दी और बेहतर तरीके से पूरा होता है।
डिजिटल डिटॉक्स के दौरान आप नेगेटिव खबरों और सोशल मीडिया की तुलना से भी दूर रहते हैं, जिससे मूड हल्का और बेहतर बना रहता है।
नो-फोन टाइम सेट करें - रोजाना कुछ घंटों के लिए फोन को साइलेंट मोड में रखें या एक कमरे में छोड़ दें, जैसे डिनर के समय या सोने से पहले का समय।
घर के कुछ हिस्सों को नो-गैजेट जोन बना दें, जैसे बैडरूम या डाइनिंग टेबल।
ऑफिस या ग्रुप मीटिंग्स में मोबाइल या लैपटॉप के बिना चर्चा करें ताकि बातचीत और ध्यान दोनों प्रभावी हो।
खाली समय में स्क्रीन देखने की बजाय किताब पढ़ें, वॉक पर जाएं या कोई हॉबी अपनाएं।
हफ्ते में एक दिन पूरी तरह से डिजिटल ब्रेक लें — सोशल मीडिया, ईमेल और चैट्स से पूरी छुट्टी।