Aug 18, 2025

डिप्रेशन और स्ट्रेस से बचना है? तो रोजाना चबाएं ये पत्ता, मिलेंगे चमत्कारी फायदे

Archana Keshri

आज की तेज रफ्तार जिंदगी और ऑफिस का कामकाज कई बार हमें तनावग्रस्त (Stress) बना देता है। लगातार स्ट्रेस रहने से दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ता है और व्यक्ति धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार भी हो सकता है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना बेहद जरूरी है।

आयुर्वेद में स्ट्रेस को कम करने और दिमाग को शांत रखने के लिए कई घरेलू नुस्खे बताए गए हैं। उन्हीं में से एक है तुलसी के पत्ते चबाना। तुलसी को आयुर्वेद में ‘चमत्कारी औषधि’ माना गया है, क्योंकि इसके पत्तों में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं जो शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

तुलसी के पत्तों में छिपा है हेल्थ का खजाना

तुलसी के पत्तों में विटामिन-सी, विटामिन-ए, विटामिन-के, कैल्शियम, जिंक, आयरन, क्लोरोफिल, मैलिक एसिड और शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। यही वजह है कि तुलसी को न केवल पूजा-पाठ में बल्कि औषधीय गुणों के कारण भी बहुत महत्व दिया जाता है।

स्ट्रेस से तुरंत राहत

तुलसी के पत्तों में एडेप्टोजेनिक गुण पाए जाते हैं, जो मानसिक तनाव को कम करने और दिमाग को शांत करने में मदद करते हैं। जब आप स्ट्रेस महसूस करें, तो ताज़े तुलसी के 4–5 पत्ते चबाएं। इससे दिमाग रिलैक्स होगा और तनाव कम होने लगेगा।

इम्यूनिटी होगी मजबूत

मानसून और मौसम बदलने पर अकसर हमारी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे सर्दी-जुकाम और संक्रमण होने लगता है। तुलसी के पत्ते एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुणों से भरपूर होते हैं। इन्हें नियमित रूप से चबाने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है।

आंखों की रोशनी के लिए लाभकारी

तुलसी में मौजूद विटामिन-ए आंखों की रोशनी को बेहतर बनाने में सहायक होता है। रोजाना तुलसी के कुछ पत्तों का सेवन करने से आंखों की सेहत सुधरती है और आंखों से जुड़ी परेशानियों में भी राहत मिलती है।

हड्डियों का दर्द होगा कम

अगर आपकी हड्डियों में अक्सर दर्द या कमजोरी रहती है, तो तुलसी के पत्ते फायदेमंद हो सकते हैं। इनमें पाया जाने वाला कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है और दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है।

खून की कमी होगी दूर

तुलसी के पत्तों में आयरन भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यही वजह है कि इसका सेवन करने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बेहतर होता है और एनीमिया (खून की कमी) की समस्या से बचाव होता है।

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