Feb 23, 2025
कुछ ऐसी वैक्सीन हैं जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और उन्हें गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करती हैं।
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बीसीजी वैक्सीन ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) के लिए है। ये वैक्सीन जन्म के तुरंत बाद या एक साल तक के अंदर लगाई जाती है। टीबी जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए ये टीका लगाया जाता है।
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हेपेटाइटिस बी वायरस (जो लिवर इंफेक्शन कर सकता है) वैक्सीन भी बच्चों को जरूर लगवा देना चाहिए। ये जन्म के 24 घंटे के भीतर और बाद में बूस्टर डोज दिया जाता है। ये वैक्सीन लिवर कैंसर और लिवर फेलियर जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करता है।
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जन्म के बाद, 6, 10 और 14 सप्ताह पर पोलियो वैक्सीन बच्चों को दी जाती है इसके बाद इसका बूस्टर डोज दिया जाता है। ये टिका पोलियो वायरस, जिससे पैरालिसिस हो सकता है उससे बचने के लिए लगाया जाता है।
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डिप्थीरिया, टेटनस और काली खांसी से सुरक्षा के लिए लगाई जाती है। ये वैक्सीन बच्चे के जन्म के 6, 10 और 14 सप्ताह की उम्र में और 5-6 साल पर बूस्टर डोज दिया जाता है।
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मेनिनजाइटिस और निमोनिया जैसी बीमारी से बचाने के लिए बच्चों को ये टीका लगाया जाता है। इसे जन्म के 6, 10 और 14 सप्ताह में दिया जाता है। इस वैक्सीन की मदद से बच्चों को घातक बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचने में मदद मिलती है।
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खसरा (मीजल्स), गलसुआ (मम्प्स) और रूबेला जैसी बीमारी से बचने के लिए ये वैक्सीन दी जैाती है। ये वैक्सीन बच्चे के जन्म के 9-12 महीने में दी जाती है और फिर इसके बाद 4-6 साल की उम्र में इसका बूस्टर डोज दिया जाता है।
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टाइफाइड से बचाव के लिए ये वैक्सीन दी जाती है। इसे 9-12 महीने की उम्र में और फिर 2 साल पर बूस्टर डोज दिया जाता है।
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यहां वो 7 वैक्सीन बताई गई हैं जो 10 साल तक के बच्चों को जरूर लगवा देना चाहिए।
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ये वैक्सीन डायरिया से बचाव के लिए दिया जाता है।
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