Apr 22, 2024
दालचीनी को डाइट में शामिल कर या दालचीनी की चाय का सेवन कर आप हैवी ब्लीडिंग से राहत पा सकते हैं। इसमें मौजूद एंटीस्पास्मोडिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी भारी रक्तस्राव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
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मेथी दाना में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है, जो वेट लॉस जर्नी में कमाल का असर दिखाते हैं। प्रोटीन फूड क्रेविंग को कम करने में मदद करता है, तो वहीं दूसरी ओर फाइबर आपको जल्दी भूख नहीं लगने देता है। फाइबर को पचने में अधिक समय लगता है, इस तरह ये मोटापे से लड़ने में आपकी मदद करता है।
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साल 2009 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर साइंस द्वारा चूहों पर किए गए एक शोध के नतीजे बताते हैं कि अश्वगंधा की चाय का सेवन ब्लड शुगर को कंट्रोल कर डायबिटीज की स्थिति में सुधार कर सकता है। ऐसे में आप खाली पेट अश्वगंधा की चाय का सेवन कर सकते हैं।
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आंवला क्रोमियम से भरपूर होता है, जो कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज्म को विनियमित करने में मदद करता है और शरीर में इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाता है, जिससे मधुमेह प्रबंधन में मदद मिलती है।
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हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुण इम्यूनिटी को बढ़ाकर आपको बीमारियों के खतरे से दूर रख सकते हैं।
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नीम में प्रभावी एंटी-फंगल गुण हैं, जो स्कैल्प पर खुजली या जलन की परेशानी से राहत दिलाने में असर दिखा सकते हैं। ऐसे में आप नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर शैंपू के बाद इस पानी से सिर धो सकते हैं।
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चुकंदर में मैंगनीज की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाने में सहायक है, जिससे पेशेंट का ब्लड शुगर लेवल मैनेज रहता है। इसके अलावा चुकंदर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है यानी ये बल्ड में शुगर की मात्रा को अधिक बढ़ने नही देता है।
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इस सब से अलग अर्जुन की छाल में भी एंटी डायबिटिक गुण मौजूद होते हैं, जो किडनी और लिवर की कैपसिटी को बढ़ाकर ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। ऐसे में शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए आप अर्जुन की छाल का पानी पी सकते हैं।
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