May 03, 2024
आसान भाषा में समझें तो शरीर की अंदरूनी साफ-सफाई को डिटॉक्सिफिकेशन कहा जाता है। इसके लिए हेल्थ एक्सपर्ट्स तमाम तरह के तरीके बताते हैं।
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हालांकि, यहां हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जो बॉडी के डिटॉक्सिफिकेशन की जरूरतों की ओर इशारा करते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में-
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अगर आप भी इन्हीं लोगों में से एक हैं और खासकर ब्लोटिंग से परेशान रहते हैं, तो यहां हम आपको इससे निजात पाने के लिए कुछ आसान तरीके बता रहे हैं।
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अगर आपको पर्याप्त आराम करने या 8 घंटे की नींद पूरी होने के बाद भी थकान का एहसास परेशान कर रहा है, तो ये इस बात का संकेत हो सकता है कि आपका शरीर विषाक्त पदार्थों से भर गया है। इस स्थिति में भी डिटॉक्सिफिकेशन जरूरी है।
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कम मल त्याग होना या मल त्यागने में कठिनाई होना भी विषाक्त पदार्थों की ओर संकेत हो सकता है। इस स्थिति में शरीर को डिटॉक्स करने की जरूरत बढ़ जाती है।
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साइकोलॉजी टुडे में प्रकाशित एक अध्ययन की रिपोर्ट बताती है कि शरीर में विषाक्त पदार्थों के निर्माण और मूड में गड़बड़ी के बीच एक मजबूत संबंध होता है। ऐसे में अगर आप बिना किसी स्पष्ट कारण के खुद को चिड़चिड़ा या मूडी महसूस करते हैं, तो डिटॉक्सिफिकेशन पर ध्यान दें।
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अगर आपकी जीभ पर सफेद या पीले रंग की परत जमने लगी है, तो ये भी शरीर में टॉक्सिन जमा होने का संकेत हो सकता है। जर्नल ऑफ ओरल साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जीभ पर कोटिंग खराब पाचन स्वास्थ्य और डिटॉक्स की आवश्यकता का संकेत हो सकती है।
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इन सब से अलग स्किन का अचानकर ड्राई होने लगना थायरॉइड की समस्या की ओर इशारा हो सकता है। इस तरह के लक्षण नजर आने पर एक बार हेल्थ एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें।
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