Apr 27, 2024
1600 ई. में कुछ अंग्रेज व्यापारियों ने इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ से भारत के साथ व्यापार करने की अनुमति ली। उस समय भारत पर मुगल बादशाह जहांगीर का शासन था।
Source: Bing Image Creator
उस समय तक पुर्तगाली यात्रियों ने भारत के लिए समुद्री मार्ग की खोज कर ली थी। उस मार्ग की जानकारी प्राप्त करने और व्यापार की तैयारी करने के बाद 1608 में 'हेक्टर' नामक जहाज इंग्लैंड से भारत के लिए रवाना हुआ।
Source: Bing Image Creator
इस जहाज के कप्तान का नाम हॉकिन्स था। हॉकिन्स का जहाज सूरत के बंदरगाह पर रुका, जो उस समय भारत का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र था। हॉकिंस अपने साथ इंग्लैण्ड के राजा जेम्स प्रथम का एक पत्र जहांगीर के नाम लाया था।
Source: Bing Image Creator
हॉकिन्स ने खुद को जहांगीर के दरबार में राजदूत के रूप में प्रस्तुत किया था। चूंकि वह इंग्लैंड के सम्राट के राजदूत के रूप में आया था, इसलिए जहांगीर ने भारतीय परंपरा के अनुसार अतिथि का विशेष स्वागत किया और उसे सम्मान दिया।
Source: Bing Image Creator
उस समय तक पुर्तगाली कालीकट में अपना डेरा जमा चुके थे और भारत में व्यापार कर रहे थे। हॉकिन्स भी व्यापार करने आया था, लेकिन जहांगीर की दयालुता और उदार व्यवहार को देखकर उसने मौके का पूरा फायदा उठाया। उस समय जहांगीर को भी नहीं पता था कि इस ब्रिटिश समुदाय के वंशज भारत पर शासन करेंगे।
Source: Bing Image Creator
हॉकिन्स ने जहांगीर को पुर्तगालियों के खिलाफ भड़काया तथा जहांगीर से कुछ विशेष सुविधाएं और अधिकार भी प्राप्त किये। इस उपकार के बदले में उसने अपनी सैन्य शक्ति का निर्माण किया और पुर्तगाली जहाजों को लूट लिया, जिससे उनका व्यापार ठप्प हो गया।
Source: Bing Image Creator
इस तरह उसने 1613 में बादशाह जहांगीर की ओर से एक शाही फरमान जारी करवा लिया कि अंग्रेजों को सूरत में फैक्ट्री बनाकर व्यापार करने की इजाजत दी जाती है। इसके साथ ही जहांगीर ने यह भी अनुमति दी कि इंग्लैंड का एक राजदूत उसके दरबार में रह सकता है।
Source: Bing Image Creator
इसका परिणाम यह हुआ कि 1615 में इंग्लैंड के शासक जेम्स प्रथम ने सर थॉमस रो को अपना राजदूत बनाकर भारत भेजा। 1616 में उसने शाहजहां से कालीकट और मछलीपट्टनम में कोठियां बनाने की अनुमति प्राप्त कर ली।
Source: Bing Image Creator
सन् 1634 तक शाहजहां से कहकर अंग्रेजों ने पुर्तगालियों को हटाकर केवल स्वयं व्यापार करने ककी अनुमति ले ली। हालांकि उस समय तक हुगली के बंदरगाह तक अपने जहाज लाने पर अंग्रेजों को भी चुंगी (टोल) देनी पड़ती थी।
Source: Bing Image Creator
लेकिन इसी बीच शाहजहां की बेटी जहांआरा गंभीर रूप से बीमार पड़ गयी। शाहजहां ने अपनी बेटी को ठीक करने के लिए हकीमों और वैद्यों की पूरी सेना लगा दी। इस अवसर का लाभ उठाकर सर थॉमस रो ने एक अंग्रेज डॉक्टर को बुलाया और जहांआरा का इलाज करवाया।
Source: Bing Image Creator
बेटी के ठीक होने पर जहांगीर सर थॉमस रो का बहुत आभारी हो गया और उसने बेटी की जान बचाने के बदले में कुछ भी देने के लिए उससे वादा कर दिया। जिसके बाद वादे में सर थॉमस रो ने हुगली में जहाज लाने और माल पर गलने वाले शुल्क को माफ करवा लिया। इस तरह से ब्रिटिश लोगों को भारत में मुक्त व्यापार कने के अनुमति मिल गई और फिर यही ब्रिटिशों ने 250 सालों तक भारत पर शासन किया।
Source: Bing Image Creator
मिथुन चक्रवर्ती समेत इन दिग्गज हस्तियों को पद्म पुरस्कार से किया गया सम्मानित