Feb 25, 2024
हर देश की करेंसी उसकी पहचान होती है। भले ही दुनिया भर में अमेरिकी डॉलर का दबदबा है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यह दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी नहीं है।
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फोर्ब्स के मुताबिक, दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी कुवैती दिनार है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय रुपया कभी कुवैत की ऑफिशियल करेंसी हुआ करती थी?
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सिर्फ कुवैत ही नहीं ऐसे कई देश थे जिनकी ऑफिशियल करेंसी भारतीय रुपया हुआ करती थी। चलिए आपको बताते हैं उन देशों के बारे में।
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1950 के दशक तक लगभग सभी वित्तीय लेनदेन के लिए संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, ओमान और कतर में भारतीय रुपये का इस्तेमाल किया जाता था।
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दरअसल, अंग्रेजों का भारत के साथ-साथ यूएई, कुवैत, बहरीन, कतर, ओमान जैसे पर्शियन गल्फ देशों पर भी कब्जा था। ब्रिटिश शासकों ने इन सभी देशों के लिए कॉमन करेंसी रखी थी।
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1935 मे जब रिजर्व बैंक बना, तब उसकी मुद्राओं को उपनिवेश गल्फ देशों में भी मान्यता मिली। यह व्यवस्था अंग्रेजों के भारत छोड़ने के बाद भी जारी रही क्योंकि खाड़ी देश तब भी अंग्रेजों के गुलाम थे।
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ब्रिटिश सरकार ने वहां के लिए अलग मुद्रा की व्यवस्था नहीं की थी। ये वो दौर था, जब खाड़ी देशों में तेल की खोज नहीं हुई थी। तब वहां सोना सस्ता मिलता था। तस्कर वहां से सस्ते में सोना खरीद कर, भारत में बेचते थे।
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तस्कर अधिक मुनाफा कमा कर और अधिक सोना खरीदते और तस्करी करते थे। इस वजह से फिर भारत ने सिस्टम में बदलाव किया और खाड़ी देशों के लिए अलग करेंसी छापने का फैसला लिया गया।
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हालांकि आज भी दुनिया में कई ऐसे देश हैं जहां औपचारिक और अनौपचारिक तरीके से भारतीय करेंसी का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और मालदीव शामिल हैं। वहीं 2014 से भारत की करेंसी रुपया को जिंबाब्वे में लीगल करेंसी के रूप में यूज किया जा रहा है।
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