'पंचायत' फेम खुशबू भाभी यानी कि एक्ट्रेस तृप्ति साहू ने अपने स्ट्रगल को लेकर बात की है। उन्होंने डिजिटल कमेंट्री संग बातचीत में बताया कि उनका 11 साल का स्ट्रगल रहा।
उन्होंने बताया कि सांवले रंग की वजह से इंडस्ट्री में भेदभाव का शिकार हुईं। उनको उनके रंग की वजह से नौकरानी या फिर आदीवासी का किरदार ऑफर किया जाता था।
तृप्ति ने बताया कि उनकी मां को भी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। रिश्तेदार अक्सर ताना मारते थे। अपने ताऊजी की बात को याद कर बताती हैं कि उन्होंने भी उल्टा बोला था।
वो शादी में गई थीं। रिश्तेदारों के साथ मिलकर खाना बना रही थीं। तभी ताऊ ने आकर कहा था कि इसको कहां डाल दिया। ना शक्ल है ना सूरत। इतनी गोरी लड़कियों को काम नहीं मिल रहा इनको कौन देगा।
तृप्ति बताती हैं कि उस समय वो महज 16 साल की थीं और वो बहुत रोईं। इस बात से डिप्रेस हो गई थीं। लेकिन उनकी मां ने साथ दिया और हारने नहीं दिया। ऑडिशन दिलाती रहीं।
एक्ट्रेस कहतीं कि ऑडिशन के लिए जातीं तो मेड या फिर आदिवासी लड़की का रोल मिला था। 'पंचायत' की खुशबू भाभी ने कहा कि कास्टिंग करने वालों को सोचना चाहिए और माइंडसेट बदलना चाहिए।
तृप्ति साहू कहती हैं कि उनके रंग की वजह से कई बार उनके हाथ से रोल छीन लिए गए। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि अमीर लड़कियां ही गोरी होती हैं।
आज तृप्ति ने अपने काम से लोगों की सोच पर तमाचा मारा है। उन्होंने साबित कर दिया कि गोरी हो या सांवली काम आता है तो पहचान भी मिलेगी।