भारत का नक्शा (मानचित्र) आज जो हम देखते हैं उसे अलग-अलग कालखंडों में बनाया गया है। इसका इतिहास सिकंदर के समय से शुरू होता है।
सबसे पहले ग्रीस के शासक सिकंदर ने भारत का पहला मानचित्र बनवाया था। उन्होंने 300 ईसा पूर्व यूनानी गणितज्ञ 'एराटोस्थनीज' को भारत का मानचित्र तैयार करने का आदेश दिया था।
मिस्र के मशहूर गणितज्ञ, खगोलविद और ज्योतिर्विद 'क्लाडियस टॉलमी' वो दूसरे व्यक्ति थे जिन्होंने 'एराटोस्थनीज' के बाद भारत का नक्शा बनाया था। हालांकि, दोनों ही नक्शे आज वाले मानचित्र से काफी अलग थे।
असल में देखा जाए तो भारत के मानचित्र पर काम 18वीं शताब्दी में जब अंग्रेज हिंदुस्तान पर शासन करने आए तब शुरू हुआ।
दरअसल, प्लासी की लड़ाई (1757) में बंगाल के शासक सिराज-उद-दौला को हराने के बाद अंग्रेज वहां की जनता से कर वसूलना चाहते थे। लेकिन, उस समय नक्शे की कमी के चलते अंग्रेजों को सही से बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्र की जानकारी नहीं थी।
इसके बाद उन्होंने भारत का मानचित्र तैयार करने का निर्णय लिया और इसकी जिम्मेदारी उन्होंने जाने मानें ज्यामिति विशेषज्ञ (Geometry Specialist) 'जैक विलियम लैम्बटन' को दी जो पहले से ही ब्रिटिश सेना में कार्यरत थे।
लैम्बटन ने भारत के सबसे दक्षिणी क्षेत्र मद्रास से भारत का नक्शा बनाना शुरू किया। जिसके लिए उन्होंने 'सरल त्रिभुज विधि' का प्रयोग किया। उन्होंने इसपर लगातार 18 साल तक काम किया लेकिन इसके बाद भी वो भारत के मानचित्र का एक तिहाई हिस्सा भी पूरा नहीं कर सके।
इसके बाद उन्होंने सेवानिवृत्ति ले ली और उनकी जगह 'जॉर्ज एवरेस्ट' को नियुक्त किया गया। भारत का आज जो हम मानचित्र देखते हैं उसे जॉर्ज एवरेस्ट ने ही बनाया था।
जॉर्ज एवरेस्ट उत्तर में हिमालय क्षेत्र तक पहुंचे और त्रिकोणमिति की सरल तकनीकों का उपयोग करते हुए उन्होंने एवरेस्ट की ऊंचाई मापी। जॉर्ज एवरेस्ट के द्वारा किया गया माप लगभग 99.75% सटीक था।