Jan 16, 2026
हम सभी ने चार वेदों के बारे में सुना है। इन्हें हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और मूल ग्रंथ माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चारों वेद वास्तव में किस विषय में बात करते हैं?
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वेद ‘श्रुति’ परंपरा का हिस्सा हैं। ‘श्रुति’ शब्द संस्कृत की धातु ‘श्रु’ से बना है, जिसका अर्थ है सुनना। मान्यता है कि ऋषियों ने ईश्वर के दिव्य ज्ञान को सुना और उसे स्मृति में संजोकर आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाया। यही ज्ञान आगे चलकर वेदों के रूप में संकलित हुआ।
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अक्सर यह माना जाता है कि वेद केवल पुरुष ऋषियों द्वारा रचे गए, लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। लोपामुद्रा, मैत्रेयी और गार्गी जैसी विदुषी महिलाओं ने भी वेदों का अध्ययन किया और मंत्रों की रचना की। ऐसी विदुषी महिलाओं को ब्रह्मवादिनी कहा जाता था, जो ब्रह्मज्ञान में निपुण थीं।
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ऋग्वेद को सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण वेद माना जाता है। इसमें कुल 1028 सूक्त (हिम्न) हैं। इन मंत्रों में इंद्र, अग्नि, वरुण, विष्णु, रुद्र जैसे वैदिक देवताओं की स्तुति की गई है। ऋग्वेद में ही प्रसिद्ध गायत्री मंत्र का उल्लेख मिलता है, जिसे आज भी सबसे पवित्र मंत्रों में गिना जाता है। यह वेद प्रकृति, देवताओं और मानव जीवन के बीच के संबंध को समझाता है।
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यजुर्वेद को यज्ञों और कर्मकांडों का वेद कहा जाता है। यह वेद मुख्य रूप से पुरोहितों के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह है, जिसमें यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों की विधियाँ बताई गई हैं। यह बताता है कि किस कर्म को कैसे और किस मंत्र के साथ करना चाहिए।
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सामवेद संगीत और स्वर का वेद है। इसमें ऋग्वेद के ही कई मंत्रों को गायन योग्य स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। यज्ञों और उपासना के समय इन मंत्रों को गाया जाता था। भारतीय शास्त्रीय संगीत की जड़ें सामवेद में ही मानी जाती हैं।
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अथर्ववेद मानव जीवन के व्यावहारिक पहलुओं से जुड़ा हुआ है। इसमें रोगों के उपचार, दीर्घायु की कामना, मानसिक शांति, गृहस्थ जीवन और सामाजिक समस्याओं से जुड़े मंत्र मिलते हैं। कुछ मंत्र तंत्र-मंत्र और जादू से भी संबंधित हैं, इसलिए इसे सबसे अलग और रोचक वेद माना जाता है।
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