Jan 27, 2026

तारों के टूटने की वजह क्या होती है, आसमान में कहां गिरते हैं?

Vivek Yadav

आसमान में टूटता हुआ तारा लगभग हर किसी ने देखा होगा। काफी लोग यह भी मानते हैं टूटते हुए तारे को देखकर कुछ मांगों तो इच्छा पूरी हो जाती है।

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टूटते हुए ज्यादातर तारे कभी पृथ्वी तक पहुंच ही नहीं बताए हैं। आइए जानते हैं ये आसमान में चमकने के बाद कहां गायब हो जाते हैं और इन्हें क्या कहते हैं?

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जो टूटता हुआ तारा नजर में आता है वह असल में उल्का होता है। पृथ्वी पर जब ये गिरता है तो उल्का पिंड कहलाता है।

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उल्का अंतरिक्ष में तैरता हुआ चट्टान या फिर धातु का एक छोटा टुकड़ा होता है। यह टुकड़े ज्यादातर टूटे हुए क्षुद्रग्रहों या फिर धूमकेतुओं द्वारा छोड़े गे धूल भरे रास्तों से आते हैं।

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जब पृथ्वी इन मलबे से भरे रास्तों से गुजरती है तो हजारों उल्का पिंड पृथ्वी के वायुमंडल के अंदर आते हैं जिसके चलते वे चमकदार रोशनी की लकीरें बनाते हैं।

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उल्का मंगल ग्रह से होते हुए आते हैं। जब ये अपने रास्ते से अलग होते हैं तो सबसे पहले मंगल ग्रह में प्रवेश करते हैं। मंगल ग्रह अपनी जगह बदल देता है जिसके चलते ये सीधे पृथ्वी में प्रवेश कर जाते हैं।

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पृथ्वी के वायुमंडल में ये काफी तेजी से आते हैं। ये 40 हजार से 70 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की गति से धरती में प्रवेश करते हैं।

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धरती के वायुमंडल में आने के बाद उल्का पिंड हवा के मॉलिक्यूल से काफी तेज से टकराता है जिससे फ्रिक्शन और कंप्रेशन होता और काफी ज्यादा गर्मी पैदा होती है।

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इसके बाद ये उल्का जलकर हवा में मिलने लगते हैं। फिर चमकदार निशान बनाते हैं और हवा में ही नष्ट हो जाते हैं। यही वजह है कि इनके टूटने पर नजर आते हैं।

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