भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनका नाम देश की इंटरनल और एक्सटर्नल सिक्योरिटी स्ट्रेटजी में एक अहम स्थान रखता है। इंटेलिजेंस सर्विस में तीन दशकों से भी अधिक समय तक सक्रिय रहने वाले डोभाल न केवल एक कुशल रणनीतिकार हैं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका सफर प्रेरणादायक रहा है।
अजीत डोभाल का जन्म वर्ष 1945 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के घीड़ी बानेलस्यूं गांव में हुआ था। उनके पिता मेजर जी. एन. डोभाल भारतीय सेना में अधिकारी थे। डोभाल की प्रारंभिक शिक्षा अजमेर, राजस्थान के मिलिट्री स्कूल में हुई, जो उस समय ‘किंग जॉर्ज रॉयल इंडियन मिलिट्री स्कूल’ के नाम से जाना जाता था।
उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर (M.A.) की डिग्री प्राप्त की और 1967 में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। शिक्षा के प्रति उनकी डेडिकेशन और एक्सीलेंस ने ही उन्हें आगे चलकर एक इंटेलिजेंट और राइटियस ऑफिसर के रूप में स्थापित किया।
1968 में अजीत डोभाल भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चुने गए। उनकी प्रारंभिक नियुक्ति केरल कैडर में हुई। लेकिन उनका रुझान खुफिया कार्यों की ओर था, इसलिए 1972 में उन्होंने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जॉइन किया। इसके बाद उन्होंने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और यहां तक कि पाकिस्तान में भी गुप्त अभियानों का नेतृत्व किया।
डोभाल को 1989 में कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया, जो देश का एक उच्च श्रेणी का वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान पाने वाले वह पहले पुलिस अधिकारी थे। मात्र 6 वर्षों की सेवा में उन्हें ‘इंडियन पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस’ भी मिला, जो सामान्यतः 17 वर्षों की सेवा के बाद मिलता है।
देश के पांचवें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपने करियर के दौरान कई साल पाकिस्तान में अंडरकवर एजेंट के रूप में बिताए हैं। इस जोखिमपूर्ण और साहसिक कार्य के चलते उन्हें अक्सर 'भारत का जेम्स बॉन्ड' भी कहा जाता है।
उन्होंने नेशनल डिफेंस कॉलेज से भी शिक्षा प्राप्त की और 2004 में एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के पुलिस प्रमुखों के अंतरराष्ट्रीय संगठन के अध्यक्ष भी चुने गए।
सेवानिवृत्ति के बाद अजीत डोभाल ने विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की स्थापना की। 2014 में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया। तब से वह लगातार इस पद पर कार्यरत हैं और भारत की सुरक्षा नीति को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।