Jan 27, 2026

केंद्रीय बजट कैसे बनता है? किन अनुच्छेदों में छिपा है बजट का ढांचा

Archana Keshri

भारत का केंद्रीय बजट (Union Budget) केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा, सरकार की प्राथमिकताओं और नीति-निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। हर साल 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के वित्तीय वर्ष के लिए केंद्र सरकार का बजट तैयार किया जाता है और आमतौर पर 1 फरवरी को इसे लोकसभा में पेश किया जाता है।

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दिलचस्प बात यह है कि भारतीय संविधान में ‘बजट’ शब्द का कहीं भी उल्लेख नहीं है, लेकिन इसके बावजूद बजट की पूरी प्रक्रिया संविधान के कई अनुच्छेदों में स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है।

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संविधान और केंद्रीय बजट का संबंध

भारतीय संविधान यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी धन का उपयोग संसदीय नियंत्रण, वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ हो। बजट की तैयारी, प्रस्तुति और क्रियान्वयन, तीनों ही चरण संविधान के ढांचे के अंतर्गत आते हैं। आइए संविधान के उन मुख्य अनुच्छेदों के बारे में जानते हैं जो बजट का आधार बनते हैं।

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अनुच्छेद 112 – वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement)

यह अनुच्छेद सरकार को हर वित्तीय वर्ष के लिए Annual Financial Statement प्रस्तुत करने का आदेश देता है। इसी में सरकार की कुल आय और खर्च का पूरा खाका होता है, यही असल में बजट है।

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अनुच्छेद 113 – अनुदानों की मांग पर मतदान (Voting on Demands for Grants)

सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के खर्च को Demands for Grants के रूप में लोकसभा में रखा जाता है। इन पर केवल लोकसभा वोट करती है। राज्यसभा को मतदान का अधिकार नहीं होता। यह संसद के निचले सदन को वित्तीय मामलों में अधिक शक्तिशाली बनाता है।

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अनुच्छेद 114 – विनियोग विधेयक (Appropriation Bill)

जब अनुदानों की मांगें पास हो जाती हैं, तब विनियोग विधेयक लाया जाता है। यह सरकार को Consolidated Fund of India से पैसा निकालने की कानूनी अनुमति देता है।

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अनुच्छेद 110 – वित्त विधेयक (Finance Bill (Money Bill))

इस अनुच्छेद के तहत करों से जुड़े प्रस्ताव पेश किए जाते हैं। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि यह केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है और राज्यसभा इसे अस्वीकार नहीं कर सकती, सिर्फ सुझाव दे सकती है।

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अनुच्छेद 117 – वित्तीय विधेयक (Financial Bills)

ऐसे विधेयक जिनमें सरकारी खर्च शामिल हो, लेकिन जो Money Bill नहीं हैं, वे इस अनुच्छेद के तहत आते हैं।

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अनुच्छेद 266 – भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India)

सरकार की सभी आय, जैसे- कर, ऋण और ऋण वापसी, इसी फंड में जाती है। संसद की मंजूरी के बिना इससे पैसा नहीं निकाला जा सकता।

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अनुच्छेद 267 – आकस्मिक निधि (Contingency Fund of India)

अचानक और आपात खर्चों के लिए यह निधि बनाई गई है। यह राष्ट्रपति के नियंत्रण में होती है, ताकि तुरंत खर्च किया जा सके।

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अनुच्छेद 109 – राज्यसभा की भूमिका (Rolen of Rajya Sabha)

राज्यसभा बजट पर चर्चा तो कर सकती है, लेकिन Money Bill को 14 दिनों के भीतर लौटाना अनिवार्य होता है। अंतिम फैसला लोकसभा का ही होता है।

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अनुच्छेद 111 – राष्ट्रपति की स्वीकृति (Presidential Assent)

विनियोग और वित्त विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही कानून बनते हैं। बिना राष्ट्रपति की सहमति के बजट लागू नहीं हो सकता।

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अनुच्छेद 116 – लेखानुदान (Vote on Account)

अगर किसी कारण से बजट समय पर पास नहीं हो पाता, तो सरकार कुछ महीनों के लिए Vote on Account के जरिए खर्च चला सकती है।

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