Dastan: राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख अशोक सिंघल को क्यों नहीं था सरकारी ट्रस्ट पर भरोसा?

अशोक सिंघल अयोध्या पहुंचे। कारसेवकों का नेतृत्व किया। इस साहस ने उन्हें आंदोलन का सबसे प्रभावशाली चेहरा बना दिया। उस कारसेवा के दौरान कारसेवकों पर गोलियां चलाई गईं। कई लोग मारे गए। यह घटना पूरे देश में आक्रोश की लहर बन गई। विवादित ढांचा उस समय सुरक्षित रहा, लेकिन इस घटना ने राम मंदिर आंदोलन को और धधका दिया। अशोक सिंघल देशभर में यात्राएं करते रहे और इस आग को बुझने नहीं दिया।

Ram Mandir donation controversy: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर देशभर में बहस छेड़ दी है। विपक्ष ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठा रहा है, जबकि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इन आरोपों को खारिज कर चुका है। लेकिन इस पूरे विवाद के बीच एक नाम फिर चर्चा में है… विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल।

अशोक सिंघल का मानना था कि राम मंदिर का निर्माण और प्रबंधन किसी सरकारी ट्रस्ट के बजाय राम जन्मभूमि न्यास के हाथों में होना चाहिए। उनका तर्क था कि यह मंदिर सरकार की नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के संघर्ष, त्याग और आस्था का परिणाम है।

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