Dastan: रुला देगी सतलुज फिल्म की ये कहानी!

मार्च और फिर जुलाई 1995 में खालड़ा अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड गए ताकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों तक अपनी बात पहुंचा सकें। कनाडा में उन्होंने संसद भवन को भी संबोधित किया। ये कोशिश थी कि मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठे, ताकि सरकार पर जांच के लिए दबाव बने। 26 जुलाई 1995 को वे पंजाब लौटे और तुरंत मीडिया में सक्रिय हो गए। इसी दौर में तरनतारन के हेड कांस्टेबल बलविंदर सिंह की कहानी सामने आई, जिनके साले को पुलिस ने उठाकर टॉर्चर किया था, और जब बलविंदर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, तो उन्हें भी धमकाया गया।

Satluj Movie Explained: 3 जुलाई 2026 को ‘सतलुज’ (पूर्व नाम: Punjab 95) ओटीटी पर रिलीज़ हुई, लेकिन सिर्फ दो दिन बाद ही भारत में इसे हटा दिया गया। आधिकारिक वजह “मौजूदा हालात” को बताया गया। आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है जिसने इसे वर्षों तक विवादों में रखा?यह फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा की सच्ची कहानी पर आधारित है। एक बैंक कर्मचारी, जिसने पंजाब के श्मशान घाटों के रिकॉर्ड खंगालकर

दावा किया कि हजारों लोगों का अंतिम संस्कार “अज्ञात” के नाम पर किया गया। उनकी जांच, प्रेस कॉन्फ्रेंस, अंतरराष्ट्रीय अभियान और फिर रहस्यमयी अपहरण व हत्या ने इस मामले को भारत के सबसे चर्चित मानवाधिकार मामलों में बदल दिया।

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