पोर्ट ऑफ मोंगला क्या है ? चीन-बांग्लादेश समझौता भारत के लिए खतरा क्यों ?

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने सत्ता संभालने के बाद अपना पहला आधिकारिक विदेश दौरा चीन का किया…22 जून से 26 जून तक चीन दौरे पर थे… इस दौरे में दोनों देशों के बीच एक दर्जन से अधिक समझौते हुए हैं… जिनमें व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, बंदरगाह, तीस्ता नदी परियोजना और रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम मुद्दे शामिल हैं…लेकिन सबसे ज़्यादा चर्चा दो फैसलों की हो रही है… पहला- 'तीस्ता नदी प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना' में चीन की बड़ी भूमिका।दूसरा- 'बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित मोंगला पोर्ट के पास चीनी Economic Zone' का विकास। खास बात यह है कि यह वही ज़मीन है… जिसे पहले भारत समर्थित परियोजना के लिए चिन्हित किया गया था… लेकिन बाद में उसे हटाकर अब एक चीनी सरकारी कंपनी को सौंप दिया गया है…मोंगला पोर्ट भारत के पूर्वी समुद्री तट के बेहद करीब है… ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या चीन अब बंगाल की खाड़ी में अपनी रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत करना चाहता है? और क्या यह भारत के लिए सिर्फ आर्थिक चुनौती है या फिर इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा और भू-राजनीति पर भी पड़ेगा? तो आखिर चीन और बांग्लादेश के बीच कौन-कौन से समझौते हुए हैं? तीस्ता नदी परियोजना में चीन की भूमिका क्या होगी? मोंगला पोर्ट क्यों इतना अहम है? और भारत के लिए इन घटनाक्रमों का क्या मतलब निकलता है? तो आइए 'World Decoder' इस एपिसोड में इस रणनीतिक बदलाव को विस्तार से समझते हैं…

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने सत्ता संभालने के बाद अपना पहला आधिकारिक विदेश दौरा चीन का किया…22 जून से 26 जून तक चीन दौरे पर थे… इस दौरे में दोनों देशों के बीच एक दर्जन से अधिक समझौते हुए हैं… जिनमें व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे, बंदरगाह, तीस्ता नदी परियोजना और रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम मुद्दे शामिल हैं…लेकिन सबसे ज़्यादा चर्चा दो फैसलों की हो रही है…पहला- ‘तीस्ता नदी

प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना’ में चीन की बड़ी भूमिका।दूसरा- ‘बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित मोंगला पोर्ट के पास चीनी Economic Zone’ का विकास। खास बात यह है कि यह वही ज़मीन है… जिसे पहले भारत समर्थित परियोजना के लिए चिन्हित किया गया था… लेकिन बाद में उसे हटाकर अब एक चीनी सरकारी कंपनी को सौंप दिया गया है…मोंगला पोर्ट भारत के पूर्वी समुद्री तट के बेहद करीब है… ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या चीन अब बंगाल की खाड़ी में अपनी रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत करना चाहता है? और क्या यह भारत के लिए सिर्फ आर्थिक चुनौती है या फिर इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा और भू-राजनीति पर भी पड़ेगा? तो आखिर चीन और बांग्लादेश के बीच कौन-कौन से समझौते हुए हैं? तीस्ता नदी परियोजना में चीन की भूमिका क्या होगी? मोंगला पोर्ट क्यों इतना अहम है? और भारत के लिए इन घटनाक्रमों का क्या मतलब निकलता है? तो आइए ‘World Decoder’ इस एपिसोड में इस रणनीतिक बदलाव को विस्तार से समझते हैं…

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