Dastan E04: नेताजी सुभाष चंद्र बोस और पंडित नेहरू के रिश्तों का अनकहा सच!

कुछ रिसर्चर्स का दावा है कि नेताजी ताइवान पहुँचे ही नहीं थे। वे सीधे मंचूरिया पहुँचे थे, जहाँ सोवियत सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। स्टालिन के लिए बोस एक उलझन थे, एक ऐसा नेता जिसने हिटलर और जापान दोनों से सहयोग लिया था। सोवियत नजरिए से यह गद्दारी जैसा था। कथित तौर पर बोस को साइबेरिया की जेल भेज दिया गया, जहाँ वे 1953 तक जीवित रहे। कुछ रूसी आर्काइव्स में संकेत मिलते हैं कि उस दौर में एक भारतीय "उच्च-प्रोफाइल कैदी" को कैद में रखा गया था। लेकिन आधिकारिक दस्तावेज कभी सामने नहीं आए। 1946 में नेहरू ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में संकेत दिया था कि बोस शायद सोवियत कब्जे में हैं।

Subhash Chandra Bose Biography: क्या सुभाष चंद्र बोस आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बन सकते थे? क्या उनकी सोच लोकतांत्रिक थी या वे भारत को एक मजबूत केंद्रीकृत शासन की ओर ले जाना चाहते थे? आखिर क्यों उनका नाम आज भी भारत के सबसे लोकप्रिय और विवादित नेताओं में गिना जाता है? इस वीडियो में हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पूरे जीवन का विश्लेषण करेंगे। जानेंगे कैसे उन्होंने आईसीएस

जैसी प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर स्वतंत्रता संग्राम का रास्ता चुना, गांधी और नेहरू से उनके वैचारिक मतभेद क्या थे, कैसे उन्होंने आज़ाद हिंद फौज का गठन किया और क्यों उनका नारा “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” भारतीय इतिहास का सबसे प्रेरणादायक नारा बन गया। इसके साथ ही हम चर्चा करेंगे नेताजी की मौत के सबसे बड़े रहस्य की। क्या वास्तव में 18 अगस्त 1945 को ताइवान में विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हुई थी? या फिर वे सोवियत संघ पहुंचे और वहां कैद कर दिए गए? क्या नेहरू सरकार को नेताजी के बारे में कुछ ऐसा पता था जो जनता से छिपाया गया?

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