China Taiwan Conflict: ताइवान कैसे है चीन की कमज़ोर नस?

द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में 1945 में जापान की हार हुई। इसके बाद ताइवान का नियंत्रण चीन की सरकार को वापस सौंप दिया गया।

ताइवान के इतिहास में सबसे बड़ा मोड़ 1895 में आया। उस समय चीन और जापान के बीच पहला चीन-जापान युद्ध हुआ था। इस युद्ध में चीन की हार हुई और शिमोनोसेकी संधि के तहत ताइवान जापान को सौंप दिया गया। इसके बाद अगले 50 वर्षों तक ताइवान जापानी शासन के अधीन रहा। द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में 1945 में जापान की हार हुई। इसके बाद ताइवान का नियंत्रण चीन

की सरकार को वापस सौंप दिया गया। उस समय चीन में राष्ट्रवादी पार्टी कुओमिनतांग की सरकार थी, जिसका नेतृत्व च्यांग काई-शेक कर रहे थे। लेकिन उसी समय चीन के भीतर एक भीषण गृहयुद्ध भी चल रहा था। एक तरफ राष्ट्रवादी सरकार थी और दूसरी तरफ कम्युनिस्ट पार्टी, जिसका नेतृत्व माओ त्से तुंग कर रहे थे। कई वर्षों तक चले इस संघर्ष का अंत 1949 में हुआ, जब कम्युनिस्टों ने जीत हासिल की और चीन पर नियंत्रण स्थापित कर लिया।वर्तमान समय में ताइवान strait दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यदि यहां किसी प्रकार का सैन्य संघर्ष होता है, तो उसका असर केवल चीन और ताइवान तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक व्यापार, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि पूरी दुनिया इस क्षेत्र की घटनाओं पर लगातार नजर रखती है।

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