सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के आतंक पर बेहद कड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार में यह भी शामिल है कि देश का हर नागरिक बिना किसी डर के सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित घूम सके. कोर्ट ने सार्वजनिक परिसरों से कुत्तों को हटाने का अपना आदेश बरकरार रखा है. बता दें कि 11 अगस्त, 2025
को 2 जजों की बेंच ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में बंद करने का आदेश दिया था. पशु प्रेमियों के विरोध को देखते हुए मामला 3 जजों की बेंच को सौंपा गया. नई बेंच ने उस आदेश को बदल दिया, लेकिन सुनवाई का दायरा देशव्यापी कर दिया. इसके बाद 7 नवंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के शैक्षणिक संस्थानों, हॉस्पिटल, बस डिपो, रेलवे स्टेशन, सरकारी दफ्तरों और स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए कहा. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर जनसत्ता ने पेट लवर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक प्रताप राय से खास बातचीत की है. इस बातचीत में राय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हर किसी को मानना चाहिए. देश में आवारा कुत्तों की संख्या इतनी कैसे बढ़ी, इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि नसबंदी के लिए सरकार द्वारा खर्च किया गया पैसा किन-किन एनजीओ को गया, इसकी गहनता से जांच होनी चाहिए.
… और पढ़ें