Rupee VS Dollar: Crude Oil महंगा, Investors भागे, रुपया अस्थिर, FM Sitharaman के बयान का क्या मतलब?

मुख्य दबाव के कारण: कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं और FII (विदेशी संस्थागत निवेशक) मार्च में ही 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की इक्विटी बेच चुके हैं। सरकार और RBI स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन निकट भविष्य में रुपया अस्थिर (volatile) रह सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह 92.50 से 93.50 के बीच स्थिर हो सकता है, पर वैश्विक अनिश्चितताओं (जियोपॉलिटिकल तनाव) के कारण दबाव बना रहेगा।सरकार का तर्क: वैश्विक परिस्थितियों में रुपया शॉक एब्जॉर्बर की भूमिका निभा रहा है, लेकिन इसकी सीमा भी है।

Nirmala Sitharaman on Rupee: रुपया हाल ही में डॉलर के मुकाबले तेजी से गिरकर 95 के स्तर तक पहुंच गया, जिससे चिंता बढ़ गई। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में स्पष्ट किया कि रुपया अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं की तुलना में ठीक-ठाक प्रदर्शन कर रहा है। फरवरी 28 (पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू) से मार्च 27 तक रुपया सिर्फ 4.1% गिरा, जबकि थाई बाहट और साउथ कोरियन वॉन

जैसी अन्य एशियाई मुद्राएं 4.5-5% गिरीं। पिछले साल अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक भी रुपया अन्य मुद्राओं के मुकाबले बेहतर रहा।

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