Bihar में वंशवाद का साया Nishant Kumar की JDU एंट्री ने खोला परिवारवाद का नया दौर?

निशांत की एंट्री से सवाल उठ रहे हैं: क्या टिकट अब योग्यता से ज्यादा सरनेम पर मिलेंगे? सत्ता और विपक्ष दोनों में वंशवाद हावी होने से मतदाताओं के पास असली विकल्प बचा है? क्या आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो रहा है और नई लीडरशिप उभरने का रास्ता बंद? नीतीश की विरासत अब परिवार तक सिमट गई है।

Nishant Kumar JDU: नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की जदयू में औपचारिक एंट्री ने बिहार की राजनीति में वंशवाद vs योग्यता की बहस को और तेज कर दिया है। टिकट वितरण में विरासत, विकल्प की कमी, आंतरिक लोकतंत्र का अंत, सरनेम का रास्ता, नई लीडरशिप की कमी, और जदयू की अपनी आलोचना से अलगाव को छूते हुए वर्तमान में बिहार की राजनीति में वंशवाद का साया अब जदयू तक

पहुंच गया है। वर्षों तक परिवारवाद की आलोचना करने वाले नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने हाल ही में जदयू की सदस्यता ग्रहण कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। 243 विधायकों वाली विधानसभा में करीब 29% विधायक राजनीतिक परिवारों से हैं—आरजेडी में 42%, जदयू में 36%।

और पढ़ें