Naxal Movement: पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ तक की पूरी कहानी!

क्या नक्सलवाद सिर्फ बंदूक और जंगल की कहानी है? या इसके पीछे जमीन, जंगल, आदिवासी अधिकार और विकास से जुड़े सवाल भी हैं? पूरी कहानी देखिए. देखते रहिए जनसत्ता. सिर्फ़ ख़बर नहीं, मायने भी…

1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ किसान विद्रोह आगे चलकर भारत के सबसे लंबे हथियारबंद आंदोलनों में से एक बन गया. लेकिन नक्सलवाद की कहानी सिर्फ नक्सलबाड़ी तक सीमित नहीं रही. CPI के भीतर वैचारिक मतभेद, 1964 में CPI(M) का गठन, 1969 में CPI(ML), People’s War Group और MCC का उदय, 2004 में CPI (Maoist) का गठन और फिर बस्तर-दंडकारण्य में माओवादी आंदोलन का विस्तार. इस पूरी

कहानी में जमीन, आदिवासी अधिकार, शोषण, विकास, राज्य की कार्रवाई और हथियारबंद क्रांति जैसे कई पहलू जुड़े रहे.इस वीडियो में नक्सलबाड़ी से लेकर माओवादी आंदोलन के विस्तार और आज की ‘अर्बन नक्सल’ और ‘दिमागी नक्सल’ की राजनीतिक बहस तक की पूरी कहानी समझिए.

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