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Maharashtra Nashik Farmers Protest: 30,000 आदिवासी किसान पैदल चले Fadnavis से मिलकर क्या हुई बातचीत?

थके पैर, लाल झंडे, लेकिन आंखों में आग। वन अधिकार कानून का इंतजार, जंगल की ज़मीन पर पट्टा न मिलना, पानी का समंदर में बहना, बिजली के भारी बिल – ये सब दर्द लेकर निकले थे। 25 जनवरी से शुरू मार्च 27 को सीएम फडणवीस तक पहुंचा। घंटों बातचीत के बाद आश्वासन मिला: तीन महीने में FRA क्लेम्स रिव्यू, मंदिर ज़मीन कानून, योजनाओं का लाभ। 28 जनवरी को मार्च थमने की उम्मीद। आखिरकार, मेहनतकश की एकजुट आवाज़ सुनी गई – ये छोटी जीत बड़ी उम्मीद है।

नाशिक से मुंबई की तरफ पैदल चल पड़े थे हजारों आदिवासी किसान – लाल झंडे लहराते, थके हुए पैर, लेकिन हौसला बुलंद। सालों से वन अधिकार कानून का इंतजार, जंगल की जमीन पर खेती करने वालों को पट्टा नहीं मिला, पानी समंदर में बह जाता है जबकि सूखे इलाके तरसते हैं, नौकरी-शिक्षा-कृषि की मांगें अनसुनी। 25 जनवरी से शुरू हुआ ये लंबा मार्च सरकार को जगाने के लिए था। 27

जनवरी को सीएम फडणवीस से मुलाकात हुई – आश्वासन मिला कि तीन महीने में दावों की समीक्षा होगी, मंदिर की जमीन पर कानून बनेगा, योजनाओं का फायदा मिलेगा। अब 28 जनवरी को मार्च वापस लेने की संभावना। आखिर किसानों की आवाज सुनी गई – उम्मीद की किरण जगी है।

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