हैकर ग्रुप प्राना ने कुछ सीक्रेट दस्तावेज़ हासिल किए हैं. जिनसे खुलासा हुआ है कि चीन की कंपनियां तुर्की में काम कर रहीं.. कंपनियों और UAE ने ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानी IRGC की बैलिस्टिक मिसाइल प्रोडक्शन के लिए कैमिकल हासिल करने में मदद की है. प्राना के मुताबिक, इस पूरे काम में चीन कंपनियों ने एक नेटवर्क के ज़रिए पैसों के लेनदेन में अहम भूमिका अदा की.
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने इन कंपनियों पर पाबंदी लगा रखी है. सीक्रेट दस्तावेज़ों के मुताबिक, ईरान के बांदर अब्बास के शाहिद राजी बंदरगाह पर 26 अप्रैल 2025 को जो धमाके हुए थे, वो सोडियम परक्लोरेट की एक खेप की वजह से हुए थे. ये वही कैमिकल है, जिसका इस्तेमाल सॉलिड मिसाइल फ्यूल प्रोडक्शन में इस्तेमाल होता है. दस्तावेज़ों के मुताबिक, धमाके और मौजूदा प्रतिबंधों की वजह से ऐसे माल को ईरान तक पहुंचाने के लिए जहाजों को ढूंढना लगातार मुश्किल हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी IRGC की कुद्स फोर्स को पैसा पहुंचाने का काम कर रही है. ये वही कंपनी है, जो ईरान के तेल को चाइनीज़ रिफाइनरों को बेचने का काम करती है. और अमेरिका ने इस पर प्रतिबंध लगा रखा है. दावा है कि इसकी वजह से IRGC के पास तेल से 1 अरब से ज्यादा की कमाई आती है. हाओकुन ने एक डॉक्यूमेंट में बताया कि उसकी गोल्डन ग्लोबल डेमिक चेलिक यानी GDCP नाम की कंपनी के साथ विशेष उपकरणों के कैमिकल प्रोडक्शन की सप्लाई के लिए एक समझौता था. एक दस्तावेज़ में ये कहा गया है कि इस डील को सीक्रेट बनाए रखने के लिए एक्सपोर्ट से जुड़े परमिट सीक्रेट माध्यमों के ज़रिए दिए जाते थे.
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