ईरान के साथ टकराव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के रक्षा मंत्री के बीच नोकझोंक हुई है. अमेरिकी न्यूज़ एजेंसी दि वॉशिंगटन पोस्ट ने मामले से वाकिफ 2 सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है. दि वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी खबर में कहा है कि रक्षा मंत्री की तरफ से उन्हें मिसाइलों और गोलाबारूद की गंभीर कमी के बारे में आखिर क्यों गुमराह किया गया? जिसकी
वजह से अब ईरान में अमेरिकी सेना की ताकत सीमित होती हुई नज़र आ रही है. दि वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ये पूरा मामला डेविड कैंप में हुई कैबिनेट मीटिंग के इतर हुआ, जहां पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगा था कि मिसाइलों की कमी की समस्या को सुलझा लिया गया होगा. रिपोर्ट के मुताबिक, 3 नवंबर 2026 को ट्रंप ने ईरान के खिलाफ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी कार्रवाई को वापस लेना का ऐलान किया था. सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने यह फैसला मिसाइलों की कमी की वजह से लिया था.लेकिन व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लैविट ने दि वॉशिंगटन पोस्ट की इस खबर को खारिज़ कर दिया है. कैरोलिन ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि डेविड कैंप में ऐसा कुछ नहीं हुआ है. यह खबर पूरी तरह से भ्रामक है. अमेरिकी न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाल से कहा है कि अमेरिका ने अपनी लंबी दूरी वाली मिसाइलों के अधिकतर ज़खीरे को ईरान के साथ 5 महीने के टकराव में खपा दिया है, जिसकी वजह से अब भविष्य में किसी भी टकराव को लेकर अमेरिकी सेना की तत्परता पर एक सवालिया निशान लग गया है.
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