खाद की एक बोरी पर ₹4500 का खर्च, सब्सिडी बिगाड़ देगी मोदी सरकार का बजट!

खरीफ सीजन से पहले सरकार किसी भी तरह खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहती है। इसी उद्देश्य से सरकारी कंपनियां बड़े पैमाने पर आयात की तैयारी कर रही हैं। 27 मई को नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड ने 17 लाख मीट्रिक टन यूरिया खरीदने के लिए वैश्विक टेंडर जारी किया। इससे पहले अप्रैल में इंडियन पोटाश लिमिटेड ने 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात करने के लिए टेंडर निकाला था। यह संकेत है कि सरकार आने वाले महीनों में संभावित कमी से बचने के लिए पहले से तैयारी कर रही है।

भारत में किसानों को मिलने वाली सब्सिडी वाली खाद अब केंद्र सरकार के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्टिलाइज़र की वैश्विक कीमतों में भारी बढ़ोतरी और ईरान-अमेरिका तनाव के कारण खाद की वास्तविक लागत ₹4,500 प्रति बोरी तक पहुंच गई है, जबकि किसानों को यह सिर्फ ₹300 में उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए फर्टिलाइज़र सब्सिडी पर 1.71

लाख करोड़ रुपये खर्च का अनुमान लगाया था, लेकिन अब यह बोझ बढ़कर करीब 3.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यानी सब्सिडी खर्च में लगभग 100% की बढ़ोतरी संभव है।

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