मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई… CJP प्रोटेस्ट से जुड़े केस पर बोले चीफ जस्टिस

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने सवाल उठाया कि जब अदालत का आदेश स्पष्ट था, तो ऐसे में नोटिस कैसे जारी किया गया। बाद में नोटिस वापस ले लिया गया, लेकिन वकील ने इसे अवमानना बताते हुए अदालत के सामने मुद्दा उठाया।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर ₹5 लाख के निजी जुर्माने की चेतावनी वाला नोटिस जारी किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। पुलिस रिपोर्ट में उन पर छात्रों को सरकार विरोधी नारे लगाकर भड़काने और सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा पैदा करने का आरोप लगाया गया था, जबकि अक्षत ने इन आरोपों को खारिज

किया है। मामला इसलिए गंभीर हुआ क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर के अपने आदेश में पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करने और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने सवाल उठाया कि जब अदालत का आदेश स्पष्ट था, तो ऐसे में नोटिस कैसे जारी किया गया। बाद में नोटिस वापस ले लिया गया, लेकिन वकील ने इसे अवमानना बताते हुए अदालत के सामने मुद्दा उठाया।

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